उद्यान विभाग पपीते की बागवानी को बढ़ावा देने के लिए किसानों को सब्सिडी प्रदान कर रहा है। इच्छुक किसान इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। जिला उद्यान अधिकारी संदीप गुप्ता ने जानकारी दी कि पूर्वांचल क्षेत्र में पपीते की खेती को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मऊ के किसानों के लिए विभाग ने लक्ष्य निर्धारित किए हैं। यह लक्ष्य बागवानी विकास योजना और मुख्यमंत्री बागवानी विकास योजना के तहत तय किए गए हैं, ताकि किसान आधुनिक तरीकों से बागवानी कर सकें। पपीते की बागवानी आमतौर पर मार्च और अप्रैल में की जाती है। उद्यान विभाग प्रति हेक्टेयर 30,000 रुपये की सब्सिडी देगा। इसमें प्रथम वर्ष में 18,000 रुपये और द्वितीय वर्ष में 12,000 रुपये शामिल हैं। यदि कोई किसान एक बीघा में बागवानी करता है, तो उसे प्रति बीघा 4,500 रुपये की सब्सिडी मिलेगी, जो कुल लागत का 40% है। इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को पंजीकरण कराना अनिवार्य है। उद्यान अधिकारी के अनुसार, आवेदन के लिए किसानों को आधार कार्ड, बैंक पासबुक और खतौनी के साथ पंजीकरण कराना होगा। सब्सिडी की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। किसान किसी भी नर्सरी से पपीते के पौधे खरीद सकते हैं, जिसकी लागत का 40% अनुदान विभाग द्वारा सीधे खाते में दिया जाएगा। इस बागवानी के लिए किसान के पास न्यूनतम 16 बिस्वा खेत होना चाहिए। इसे सहफसली के रूप में भी उगाया जा सकता है। पंजीकरण की अंतिम तिथि 15 फरवरी है। चूंकि पपीते की बागवानी मार्च में शुरू होती है, इसलिए समय पर आवेदन महत्वपूर्ण है। बाजार में पपीते की मांग पूरे साल बनी रहती है और इसका उपयोग विभिन्न रूपों में किया जाता है, जिससे यह एक लाभदायक फसल साबित होती है।
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