मऊ जिला कलेक्ट्रेट परिसर में अभिभावक मंच ने निजी विद्यालयों द्वारा नियमों के उल्लंघन के विरोध में प्रदर्शन किया। मंच ने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर इस मामले में कार्रवाई की मांग की है। अभिभावक मंच का आरोप है कि जिले में संचालित बड़ी संख्या में मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त निजी विद्यालय उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम, 2018 और नेशनल बिल्डिंग कोड के प्रावधानों का उल्लंघन कर रहे हैं। यह अधिनियम 12 सितंबर 2018 को लागू हुआ था। मंच ने बताया कि उन्होंने इस संबंध में जिलाधिकारी कार्यालय को पहले भी कई बार लिखित शिकायतें दी हैं। हालांकि, निजी विद्यालयों के खिलाफ अब तक कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे विद्यालय प्रबंधन मनमाने ढंग से नियमों की अनदेखी कर रहे हैं। ज्ञापन में अभिभावक मंच ने कई मांगें रखीं। उन्होंने कहा कि सभी निजी विद्यालयों को निर्देश दिया जाए कि वे नए शिक्षण सत्र 2026-27 शुरू होने से कम से कम 60 दिन पहले अपनी वेबसाइट पर पाठ्य-पुस्तकों की सूची अनिवार्य रूप से प्रकाशित करें। यह उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित स्वतंत्र विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम, 2018 में स्पष्ट रूप से वर्णित है। मंच ने यह भी मांग की कि जनपद के सभी निजी विद्यालयों में केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS) की तर्ज पर पाठ्य-पुस्तकों की सूची लागू की जाए, ताकि अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े। इसके अतिरिक्त, निजी प्रकाशकों की पुस्तकों द्वारा पठन-पाठन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाकर केवल एनसीईआरटी या मानक पुस्तकों को ही मान्यता दी जाए। अभिभावक मंच ने सभी इंग्लिश मीडियम विद्यालयों में एक समान पाठ्यक्रम (सिलेबस) लागू करने की भी मांग की, जिससे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, समानता और गुणवत्ता बनी रहे। अंत में, उन्होंने सभी निजी विद्यालयों में नेशनल बिल्डिंग कोड का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित कराने पर जोर दिया, क्योंकि अधिकांश विद्यालय वर्तमान में इन मानकों पर खरे नहीं उतरते, जो बच्चों की सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
https://ift.tt/bCsfmFa
🔗 Source:
Visit Original Article
📰 Curated by:
DNI News Live

Leave a Reply