मऊ जिले के घोसी तहसील क्षेत्र के पकड़ी बुजुर्ग गांव के किसान रामलेश मौर्य स्ट्रॉबेरी की खेती से लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं। उन्होंने पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक बागवानी को अपनाया है, जिससे उनकी स्ट्रॉबेरी की बाजार में अच्छी मांग है। किसान रामलेश मौर्य ने बताया कि उन्हें उद्यान विभाग से स्ट्रॉबेरी की खेती से जुड़ी पूरी जानकारी, बीज और अनुदान मिला था। शुरुआत में उन्होंने विभागीय सहयोग से खेती की थी, लेकिन इस बार उन्होंने स्वयं एक एकड़ क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी की खेती की है।रामलेश मौर्य ने विंटरडाउन प्रजाति की स्ट्रॉबेरी लगाई है, जिसे बेहतर उपज देने वाली किस्म माना जाता है। इसकी खेती के लिए अक्टूबर में प्लांटेशन किया जाता है और जनवरी से कटाई शुरू हो जाती है। पहले 2 तस्वीरें देखिए… वे लगभग 80 प्रतिशत जैविक तरीके से स्ट्रॉबेरी उगा रहे हैं, हालांकि इसमें फंगस लगने का खतरा रहता है, जिसके लिए सतर्कता जरूरी होती है।एक एकड़ में की गई खेती से मात्र दो महीने में ही कटाई शुरू हो गई। जनवरी माह में अब तक ढाई क्विंटल तक स्ट्रॉबेरी का उत्पादन हो चुका है। उनकी स्ट्रॉबेरी बाजार में 350 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रही है और स्थानीय बाजार से अधिक इसकी सीधी मांग बनी हुई है।किसान रामलेश मौर्य के अनुसार, स्ट्रॉबेरी की खेती में लगभग तीन लाख रुपये की लागत आई है, जिससे उन्हें करीब चार लाख रुपये तक की बचत होने की संभावना है।उद्यान अधिकारी संदीप गुप्ता ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विज्ञान योजना के तहत पिछले वर्ष स्ट्रॉबेरी की खेती की शुरुआत की गई थी। इस वर्ष किसान रामलेश मौर्य ने स्वयं एक एकड़ में इसकी खेती कर सफलता हासिल की है। वे अब मऊ जिले के किसानों के लिए एक प्रेरणा बन चुके हैं और उन्हें जिला स्तर पर सम्मानित भी किया जा चुका है।उद्यान अधिकारी ने यह भी बताया कि यदि किसान सही तकनीक अपनाकर स्ट्रॉबेरी की खेती करें, तो वे मात्र चार महीने में ही चार लाख रुपये तक का मुनाफा कमा सकते हैं।
https://ift.tt/mDiKUW9
🔗 Source:
Visit Original Article
📰 Curated by:
DNI News Live

Leave a Reply