मिर्जापुर में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने जा रही फिल्म ‘घूसखोर पंडत’ का विरोध विंध्याचल धाम तक पहुंच गया है। ब्राह्मण समाज ने फिल्म के शीर्षक और संवादों को आपत्तिजनक बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। इस दौरान मां विंध्यवासिनी मंदिर प्रांगण में बुद्धि शुद्धि यज्ञ का आयोजन किया गया और बैनर-पोस्टर लेकर प्रदर्शन किया गया। ब्राह्मण समाज के सदस्यों ने कहा कि फिल्म का नाम और इसके संवाद एक विशेष समाज की छवि को धूमिल कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मनोरंजन के नाम पर एक सम्मानित समाज को अपमानित किया जा रहा है, जिसे स्वीकार नहीं किया जाएगा। यज्ञ के माध्यम से फिल्म से जुड़े कलाकारों, निर्देशक और ओटीटी प्लेटफॉर्म की “बुद्धि शुद्धि” की कामना की गई। समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि फिल्म में एक संवाद है, जिसमें कहा गया है कि “ब्राह्मण लंगोट का ढीला होता है।” उन्होंने इन संवादों को बेहद आपत्तिजनक बताया और कहा कि इन्हें ब्राह्मण समाज को बदनाम करने की मंशा से डाला गया है। उनका कहना था कि फिल्म का शीर्षक भी जानबूझकर ऐसा रखा गया है, जिससे समाज की नकारात्मक छवि प्रस्तुत हो। समाज के लोगों ने स्पष्ट किया कि वे किसी फिल्म या रचनात्मक अभिव्यक्ति के विरोधी नहीं हैं, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर किसी समाज विशेष की भावनाओं को ठेस पहुंचाना अनुचित है। उन्होंने चेतावनी दी कि इससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका है। उन्होंने फिल्म के नाम और विवादित संवादों को तत्काल हटाने की मांग की। फिल्म में मुख्य पात्र की भूमिका अभिनेता मनोज बाजपेयी निभा रहे हैं, जो एक पुलिस अधिकारी अजय दीक्षित के किरदार में हैं। फिल्म में उन्हें ‘पंडित’ नाम से संबोधित किया गया है। यह फिल्म एक थ्रिलर बताई जा रही है, लेकिन इसके शीर्षक और संवादों को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। ब्राह्मण समाज ने चेतावनी दी है कि यदि फिल्म से आपत्तिजनक नाम और संवाद नहीं हटाए गए तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
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