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बैंगलोर-पुणे की तर्ज पर गोरखपुर में बन रही स्मार्ट सड़कें:सीएम ग्रीड फेज-2 का काम शुरू, नगर आयुक्त बोले- समय से पहले पूरा होगा काम

गोरखपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ड्रीम प्रोजेक्ट सीएम ग्रीड सड़क योजना के फेज–2 का काम शुरू हो गया है। इस योजना के तहत शहर की सबसे व्यस्त और महत्वपूर्ण सड़कों को स्मार्ट और टिकाऊ बनाया जा रहा है। फिलहाल गोलघर इलाके में सड़कों के किनारे नाला निर्माण का काम तेजी से चल रहा है। बैंगलोर और पुणे की तर्ज पर सड़क को स्मार्ट बनाने का काम किया जा रहा जाएगा। फेज–2 के अंतर्गत कुल तीन प्रमुख रूट को शामिल किया गया है: 1. शास्त्री चौक से छात्रसंघ चौराहा तक। यह सड़क शास्त्री चौक से अंबेडकर चौक होते हुए छात्रसंघ चौराहा तक जाएगी। लंबाई: 2370 मीटर चौड़ाई: 24 मीटर लागत: 27.02 करोड़ रुपये 2. शिवाय होटल से गणेश चौक तक। यह रूट शिवाय होटल से विजय चौक होते हुए गणेश चौक तक जाएगा। लंबाई: 1250 मीटर चौड़ाई: 15 मीटर लागत: 14.84 करोड़ रुपये 3. कचहरी चौराहा से काली मंदिर चौक तक लंबाई: 842 मीटर चौड़ाई: 24 मीटर लागत: 11.82 करोड़ रुपये नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने दैनिक भास्कर से बातचीत में बताया कि सीएम ग्रीड सड़क परियोजना फेज–2 का काम तय समय में पूरा कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि गोलघर में काम शुरू करना सबसे चुनौतीपूर्ण था, क्योंकि यह इलाका गोरखपुर का “हार्ट” माना जाता है। अच्छी बात यह है कि यहां के व्यापारियों का भी पूरा सहयोग मिल रहा है। आगे इसी तरह फेज–3 का काम भी किया जाएगा। भूमिगत बिजली लाइन और गैस पाइपलाइन नई सड़कों पर बिजली की लाइनें जमीन के नीचे डाली जाएंगी। इसके लिए अलग से ट्रेंच बनाई जाएगी, जिससे भविष्य में बिजली फॉल्ट होने पर सड़क खोदने की जरूरत न पड़े।
इसके साथ ही गैस पाइपलाइन बिछाई जाएगी, अतिक्रमण हटाया जाएगा, टेलीकॉम कंपनियों को पहले से अपनी योजना साझा करने को कहा गया है। 15 महीने में पूरा होगा प्रोजेक्ट इस परियोजना को पूरा करने की अवधि 15 महीने तय की गई है। नगर निगम का लक्ष्य है कि नवंबर 2026 तक सभी काम पूरे कर लिए जाएं। इसके बाद गोलघर की सड़कें पूरी तरह स्मार्ट रोड के रूप में नजर आएंगी। जानिए क्यों खास है सीएम ग्रीड सड़क परियोजना सीएम ग्रीड सड़क परियोजना उत्तर प्रदेश सरकार की एक महत्वाकांक्षी योजना है, जिसका उद्देश्य शहरों की मुख्य सड़कों को आधुनिक और टिकाऊ बनाना है। इंटीग्रेटेड सिस्टम: सड़क बनने से पहले जलकल, बिजली, गैस, टेलीकॉम और नगर निगम मिलकर योजना बनाते हैं, ताकि हर लाइन तय जगह से गुजरे। टिकाऊ सड़कें: सड़कें इस तरह बनती हैं कि 10–15 साल तक खुदाई की जरूरत न पड़े। आधुनिक सुविधाएं: स्मार्ट स्ट्रीट लाइट, बेहतर ड्रेनेज, चौड़ी सड़कें, कहीं फुटपाथ, साइकिल ट्रैक और हरियाली भी। शहर की पहचान बदलेगी: इन सड़कों को दिल्ली, पुणे और बेंगलुरु जैसी स्मार्ट सड़कों की तर्ज पर बनाया जा रहा है, जिससे शहर का मुख्य बाजार और प्रमुख मार्ग आधुनिक दिखेंगे।


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