बुंदेलखंड राष्ट्र समिति ने बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर एक नए चरण के आंदोलन की घोषणा की है। केंद्रीय अध्यक्ष प्रवीण पांडे ने बताया कि 1 फरवरी 2026 को दिल्ली में इंडिया गेट से राष्ट्रपति भवन तक “संकल्प से सिद्धि की ओर” नामक एक मौन और अहिंसक कर्तव्य मार्च निकाला जाएगा। इसके बाद राष्ट्रपति भवन की मौन परिक्रमा कर राष्ट्रपति को बुंदेलखंड राज्य के गठन संबंधी ज्ञापन सौंपा जाएगा। पांडेय ने फतेहपुर जिले के खागा नगर स्थित अमर शहीद ठाकुर दरियाव सिंह स्मारक पर यह जानकारी दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह परिक्रमा पूरी तरह शांतिमय और प्रतीकात्मक होगी। आंदोलन में शामिल सभी बुंदेलखंडी सफेद वस्त्रों में होंगे और मुंह पर सफेद पट्टी बांधकर मौन रहेंगे। यह मौन वर्षों से उपेक्षित बुंदेलखंड की पीड़ा, जल संकट, बेरोजगारी और पलायन के खिलाफ एक सशक्त लोकतांत्रिक संदेश होगा। प्रवीण पांडे ने जोर देकर कहा कि बुंदेलखंड का सवाल किसी दल या व्यक्ति का नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों के भविष्य का प्रश्न है। उन्होंने कहा, “विकसित भारत–2047 का सपना तभी पूरा होगा, जब बुंदेलखंड को उसका संवैधानिक अधिकार—अलग राज्य—मिलेगा।” प्रवीण पांडे ने याद दिलाया कि इससे पहले 25 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर बुंदेलखंड के सभी जिलों से बुंदेलखंड राष्ट्र समिति के कार्यकर्ता एकत्रित हुए थे। उस प्रदर्शन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे बुंदेलखंड राज्य गठन की मांग रखी गई थी। उन्होंने बताया कि 1 फरवरी का कार्यक्रम उसी संघर्ष की निरंतरता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। इस आंदोलन में किसानों, युवाओं, महिलाओं, सामाजिक संगठनों और बुद्धिजीवियों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। पांडे ने सभी बुंदेलखंडवासियों से शांतिपूर्ण, अनुशासित और लोकतांत्रिक तरीके से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की।
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