मऊ भ्रष्टाचार के एक मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय ने बिजली विभाग के सहायक भंडारी को 5 साल के कारावास और 50 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला महज 17 माह 10 दिन के भीतर आया है। यह मामला वर्ष 2019 का है, जब विद्युत भंडार केंद्र पर तैनात सहायक भंडारी जितेंद्र कुमार पांडे ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बिजली विभाग के स्टोर में लेन-देन के दौरान भारी गबन किया था। इस कृत्य से विभाग की छवि धूमिल हुई और उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना हुई। वाराणसी और आजमगढ़ मंडल के अधीक्षण अभियंताओं द्वारा कराई गई जांच में आरोपी पर कुल 87 लाख 26 हजार 846 रुपए 43 पैसे के गबन का आरोप सिद्ध हुआ। सहायक अभियंता विद्युत भंडार केंद्र मऊ, रोहित जैन की रिपोर्ट के आधार पर 6 जुलाई 2023 को आरोपी को निलंबित करते हुए उसके विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराने की संस्तुति की गई थी। थाना कोतवाली में मुकदमा संख्या 623/2023, धारा 409 आईपीसी के तहत दर्ज होने के बाद, माननीय सीजेएम न्यायालय ने त्वरित सुनवाई करते हुए मात्र 1 वर्ष 5 माह में फैसला सुना दिया। अभियोजन अधिकारी हरेंद्र सिंह ने बताया कि अदालत ने आरोपी को 5 वर्ष का कारावास और 50 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने की स्थिति में 3 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। दोषसिद्धि के बाद गिरफ्तारी से लेकर जेल में बिताई गई 2 वर्ष 3 दिन की अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। इस फैसले को भ्रष्टाचार के खिलाफ न्यायालय की सख्ती और त्वरित न्याय का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।
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