बाराबंकी जिला न्यायालय परिसर में गुरुवार को वकीलों के बीच ‘वकील बनाम वकील’ का विवाद सामने आया। बार एसोसिएशन के सामूहिक निर्णय के खिलाफ जाकर एक अधिवक्ता द्वारा टोलकर्मियों की जमानत याचिका दाखिल करने की बात सामने आने पर भारी हंगामा और आगजनी हुई। नाराज सैकड़ों अधिवक्ताओं ने संबंधित वकील के बस्ते पर पहुंचकर मेज और कुर्सियों को आग के हवाले कर दिया। यह मामला हैदरगढ़ टोल प्लाजा पर एक अधिवक्ता के साथ हुई मारपीट से जुड़ा है। टोलकर्मियों ने अधिवक्ता के साथ न केवल मारपीट की थी, बल्कि अभद्रता भी की थी। इस घटना से आक्रोशित लखनऊ और बाराबंकी के वकीलों ने बड़ा आंदोलन किया था, जिसके बाद पुलिस ने आरोपियों को जेल भेजा था। उस समय जिला बार एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया था। इसमें तय किया गया था कि कोई भी स्थानीय वकील इन टोलकर्मियों की पैरवी नहीं करेगा और न ही उनकी जमानत याचिका दाखिल करेगा। यह निर्णय वकीलों के स्वाभिमान की लड़ाई के तौर पर लिया गया था। बृहस्पतिवार को अधिवक्ताओं को जानकारी मिली कि अधिवक्ता मनोज शुक्ला ने बार के फैसले का उल्लंघन करते हुए गुपचुप तरीके से कोर्ट में टोलकर्मियों की जमानत याचिका दाखिल कर दी है। इस खबर से माहौल गरमा गया। देखते ही देखते जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेंद्र वर्मा और अन्य पदाधिकारियों के साथ वकीलों का एक बड़ा समूह मनोज शुक्ला की मेज पर जा पहुंचा। चूंकि आरोपी अधिवक्ता वहां मौजूद नहीं था, वकीलों ने उसकी मेज और कुर्सियों को सड़क पर फेंककर उनमें आग लगा दी। हंगामे के बीच जिला बार अध्यक्ष नरेंद्र वर्मा ने स्पष्ट किया कि जब पूरे जिले के वकीलों ने एक स्वर में आरोपियों की पैरवी न करने का फैसला लिया था, तो मनोज शुक्ला ने निजी स्वार्थ के लिए उस सामूहिक निर्णय का उल्लंघन किया है। उन्होंने इसे साथी के सम्मान से जुड़ा विषय बताया। वर्मा ने चेतावनी दी कि जो भी अधिवक्ता बार के फैसलों के खिलाफ जाएगा, उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इस दौरान कचहरी परिसर में घंटों तक वकील एकता के नारे गूंजते रहे।
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