पाकिस्तान की जेल में बंद अलीगढ़ के बरला थाना के गांव खिटकारी निवासी बादल बाबू की सजा पूरी हो चुकी है, लेकिन महज 5 हजार पाकिस्तानी रुपए का जुर्माना उसकी वतन वापसी में सबसे बड़ी बाधा बन गया है। सोमवार को परेशान पिता कृपाल सिंह अपनी पत्नी के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी के माध्यम से भारत सरकार से बेटे को वापस लाने की गुहार लगाई। बिना वीजा पहुंचा था पाकिस्तान कृपाल सिंह ने बताया कि उनका बेटा बादल बाबू इंस्टाग्राम के जरिए पाकिस्तान की युवती सना के संपर्क में आया था। बातचीत बढ़ी और प्रेम में पड़कर वह किसी तरह बिना वीजा के पाकिस्तान पहुंच गया। वहां पहुंचते ही पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों ने उसे हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। 27 दिसंबर 2025 को सजा पूरी कूपाल सिंह का कहना है कि 27 दिसंबर 2024 से बादल पाकिस्तान की जेल में बंद था। एक साल की सजा पूरी होने के बाद 27 दिसंबर 2025 को पाकिस्तानी अदालत ने उसे बरी कर दिया, लेकिन 5 हजार पाकिस्तानी रुपए का जुर्माना लगाया। जुर्माना जमा न होने के कारण फिलहाल उसे डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। ‘मजदूर हूं साहब… 5 हजार भी बड़ी रकम है’ कलेक्ट्रेट में मीडिया से बातचीत करते हुए कृपाल सिंह की आंखें भर आईं। उन्होंने कहा, ‘मैं मजदूरी करता हूं साहब। दाने-दाने को मोहताज हूं। वहां के वकील कह रहे हैं कि जुर्माना जमा होगा, तभी बेटा छोड़ा जाएगा। सरकार से हाथ जोड़कर विनती है कि बेटा वापस ले आइए।’ बादल के इस्लाम कबूल करने के मामले में भावुक होते हुए बोले कि ‘मुझे नहीं पता उसने वहां क्या किया। वो कोई भी धर्म माने, लेकिन है तो मेरा बेटा। कोई भी मां-बाप अपने बच्चे को बेसहारा नहीं छोड़ सकता।’ प्रार्थनापत्र सौंपकर केंद्र सरकार से अपील कृपाल सिंह ने जिलाधिकारी की गैरमौजूदगी में एडीएम सिटी किंशुक श्रीवास्तव को प्रार्थनापत्र सौंपा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से गुहार लगाई है। उनका कहना है कि पिछले एक साल से उनकी बेटे से कोई सीधी बातचीत नहीं हो पाई है। वकील के जरिए ही जानकारी मिल रही है।
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