बागपत में नवनिर्मित संविधान पार्क में स्थापित संविधान की प्रस्तावना में कथित छेड़छाड़ को लेकर विवाद गहरा गया है। कांग्रेस नेताओं ने इस संबंध में जिलाधिकारी कार्यालय में एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें गंभीर आपत्ति दर्ज कराई गई है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि संविधान पार्क में लगी प्रस्तावना की प्रतिकृति में ऐसे शब्द जोड़े गए हैं, जिनका मूल संविधान की प्रस्तावना में उल्लेख नहीं है। कांग्रेस नेताओं के अनुसार, 26 जनवरी को उद्घाटन किए गए इस पार्क में प्रदर्शित प्रस्तावना में तथ्यों से छेड़छाड़ की गई है, जो संविधान की मूल भावना के विपरीत है। कांग्रेस ने इसे संविधान का अपमान बताते हुए कहा कि यह कृत्य न केवल असंवैधानिक है, बल्कि सामाजिक समरसता और संवैधानिक मूल्यों के लिए भी घातक है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के केशवानंद भारती बनाम भारत सरकार मामले का हवाला दिया, जिसमें कहा गया था कि संविधान की मूल संरचना से छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि 42वें संविधान संशोधन के बावजूद प्रस्तावना की मूल तिथि और भावना अपरिवर्तित मानी जाती है। कांग्रेस नेताओं ने सर्वोच्च न्यायालय के हालिया फैसले का भी जिक्र किया, जिसमें प्रस्तावना से जुड़े एक मामले में याचिका खारिज कर यह स्पष्ट संदेश दिया गया था कि संविधान की प्रस्तावना के साथ मनमानी नहीं की जा सकती। कांग्रेस प्रतिनिधियों ने मांग की है कि संविधान पार्क में लगी प्रस्तावना की प्रतिकृति को तत्काल सही कराया जाए और संविधान की गरिमा को पुनः स्थापित किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो इस मामले को लेकर व्यापक आंदोलन किया जाएगा। जिलाधिकारी कार्यालय में एडीएम शिवनारायण को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की गई है।
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