भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने बागपत के दोघट कस्बे में खाप चौधरियों द्वारा लिए गए सामाजिक फैसलों का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि समाज में बढ़ती सामाजिक बुराइयों पर अंकुश लगाने के लिए ऐसे निर्णय आवश्यक हैं। टिकैत ने 18 वर्ष से कम उम्र के लड़के-लड़कियों के मोबाइल फोन रखने और छोटे कपड़े पहनने पर नियंत्रण की बात कही। नरेश टिकैत ने कहा कि कम उम्र के बच्चों में मोबाइल का अत्यधिक उपयोग कई सामाजिक समस्याओं को जन्म दे रहा है। ऐसे में 18 साल से कम उम्र के बच्चों को मोबाइल फोन के इस्तेमाल में संयम बरतना चाहिए। उन्होंने सार्वजनिक स्थानों पर पहनावे, बैठने, हंसने और बोलने में भी मर्यादा बनाए रखने पर जोर दिया। टिकैत के अनुसार, समाज को सही दिशा देने के लिए अनुशासन और संस्कार जरूरी हैं, और खापों के ये फैसले उसी दिशा में एक प्रयास हैं। इस दौरान किसान नेता ने गन्ना भुगतान को लेकर सरकार और चीनी मिलों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि किसान पूरी मेहनत से गन्ना उत्पादन कर रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद मिलें समय पर भुगतान नहीं कर रही हैं। कई किसानों को अपने ही पैसे के लिए एक साल तक इंतजार करना पड़ रहा है। टिकैत ने आरोप लगाया कि गन्ना कम दर पर मिलों को बेचा जा रहा है और फिर भी भुगतान में देरी हो रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने गन्ना मूल्य में 30 रुपये की बढ़ोतरी तो की, लेकिन उसी में से 3 रुपए प्रति क्विंटल परिवहन किराये के नाम पर काट लिए गए, जबकि परिवहन का भाड़ा किसानों की जिम्मेदारी नहीं है। उन्होंने कहा कि किसान दुखी हैं, लेकिन धरना-प्रदर्शन से आम जनता को परेशानी होती है। इसके बावजूद यदि सरकार धरना-प्रदर्शन के बाद भी किसानों से बातचीत नहीं करती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री की होगी। नरेश टिकैत ने स्पष्ट किया कि पीड़ित किसान को अपनी आवाज उठाने का पूरा अधिकार है।
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