बलिया कलक्ट्रेट में मंगलवार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माले) ने जिला चिकित्सालय में व्याप्त अव्यवस्थाओं के विरोध में प्रदर्शन किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी को संबोधित एक ज्ञापन उनके प्रतिनिधि को सौंपा। पार्टी नेता लक्ष्मण यादव ने आरोप लगाया कि जिला अस्पताल में सीएमएस सहित छह सर्जन कार्यरत हैं, लेकिन वहां हर्निया और हाइड्रोसील के अलावा पित्त की थैली की पथरी का ऑपरेशन नहीं हो पा रहा है। उन्होंने बताया कि स्वयं सर्जन होने के बावजूद सीएमएस एक भी ऑपरेशन नहीं करते हैं। यादव ने यह भी बताया कि अस्पताल के ऑपरेशन कक्ष में हड्डी के ऑपरेशन के लिए सहायक सी-आर्म मशीन पिछले कई महीनों से खराब पड़ी है। इसके कारण टूटी हड्डियों का ऑपरेशन नहीं हो पा रहा है, जबकि अस्पताल में इसके लिए बजट उपलब्ध है। उन्होंने आरोप लगाया कि सीएमएस ने इमरजेंसी ड्यूटी के लिए संबद्ध डॉक्टरों को ओपीडी में लगा दिया है और उन्हें अलग-अलग कक्ष आवंटित कर दिए हैं। वहीं, अन्य विशेषज्ञ डॉक्टरों को छोटे कमरों में बैठकर मरीजों को देखने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
करीब एक वर्ष से जिला अस्पताल में नाक, कान, गला और चर्म रोग विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं हैं, जबकि इन पदों का सृजन किया जा चुका है। इमरजेंसी में तैनात डॉक्टर मरीजों के परिजनों को छोटी पर्ची पर निजी दवाएं लिखकर देते हैं, जिससे उन्हें बाहर की दुकानों से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। इसके अलावा, वे विशेषज्ञ डॉक्टरों से सलाह लिए बिना मरीजों को निजी एम्बुलेंस से मऊ के निजी अस्पतालों में रेफर कर रहे हैं, और ऑन-कॉल विशेषज्ञ डॉक्टरों को इसकी सूचना भी नहीं देते। पार्टी ने कहा कि सीएमएस इन सभी अव्यवस्थाओं से अवगत होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, जिससे अस्पताल की कार्यप्रणाली गैर-जिम्मेदाराना हो गई है। भाकपा (माले) ने मांग की है कि जिला चिकित्सालय की व्यवस्थाओं को सुधारने के लिए तत्काल उचित कदम उठाए जाएं, ताकि मरीजों को सरकारी सुविधाओं का समुचित लाभ मिल सके।
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