बलरामपुर जिले में तीन लाख से अधिक व्यक्तिगत शौचालयों के निर्माण और सामुदायिक शौचालयों की उपलब्धता के बावजूद खुले में शौच की समस्या बनी हुई है। सरकार द्वारा 12 हजार रुपये की आर्थिक सहायता और जागरूकता अभियानों के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अभी भी खुले में शौच कर रहे हैं। इस गंभीर स्थिति पर संज्ञान लेते हुए, बीडीओ सदर संजय कुमार ने सभी ग्राम प्रधानों को चेतावनी दी है। उन्होंने प्रधानों से अपने-अपने गांवों में ग्रामीणों को खुले में शौच के दुष्परिणामों के बारे में समझाने और शौचालयों के नियमित उपयोग को सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
बीडीओ ने स्पष्ट किया कि जो प्रधान अपने गांव को मॉडल पंचायत के रूप में विकसित करेगा, उसे जिलाधिकारी और पंचायती राज विभाग द्वारा नकद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किया जाएगा। यह मूल्यांकन केवल कागजी दावों पर नहीं, बल्कि जमीनी हकीकत के आधार पर किया जाएगा। खुले में शौच की मानसिकता को बदलने के लिए, ग्राम्य विकास विभाग द्वारा हर सोमवार को गांवों में चौपाल लगाई जाएगी। इन चौपालों में ग्रामीणों को स्वच्छता, स्वास्थ्य और शौचालय के उपयोग के महत्व के बारे में जागरूक किया जाएगा।
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