उत्तर प्रदेश सरकार ने बलरामपुर जिले में ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन वेटलैंड’ योजना लागू की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर यह योजना जिले के प्राकृतिक जलस्रोतों के संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई है। इस योजना के तहत जिले की उन महत्वपूर्ण आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) का संरक्षण और सौंदर्यीकरण किया जाएगा, जो अतिक्रमण, उपेक्षा और प्राकृतिक क्षरण के कारण संकटग्रस्त हैं। इनके पुनर्जीवित होने से भूजल स्तर में सुधार होगा और ये वर्षा जल संचयन के प्रभावी प्राकृतिक स्रोत के रूप में कार्य करेंगी। वेटलैंड्स के संरक्षण से स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र में सकारात्मक बदलाव आएगा। यह लुप्तप्राय वनस्पतियों के साथ-साथ प्रवासी पक्षियों और अन्य वन्य जीवों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल बनेंगे। इससे बलरामपुर में ईको-टूरिज्म की संभावनाओं को भी बढ़ावा मिलेगा। वन विभाग ने वर्ष 2024 में सदर तहसील के फत्तेजोत स्थित चंदा वेटलैंड, तुलसीपुर के महादेव हरिहर नगर स्थित ओजहवा वेटलैंड और रानीजोत के भुइला वेटलैंड के संरक्षण का प्रस्ताव तैयार किया है। इसके अतिरिक्त, चांदे ताल, केरावगढ़ तालाब, रामपुर बनेघुसरा और चारोकाफरी जिले के प्रमुख वेटलैंड्स में शामिल हैं, जहाँ वर्षभर आर्द्रता बनी रहती है। सोहेलवा वन क्षेत्र में भंगवानपुर जलाशय, रामपुर, कोहरगड्डी, चित्तौड़गढ़, मजगवां, रजियाताल, हथियाकुंडा और खैरमान सहित कुल 13 जलाशय और 56 पहाड़ी नाले मौजूद हैं। इनमें से 16 पहाड़ी नालों में पूरे वर्ष पानी उपलब्ध रहता है, जो वन्य जीवों के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक जलस्रोत हैं। पूर्व में जिले की 22 वेटलैंड्स के संरक्षण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के सहयोग से तीन वेटलैंड्स का संक्षिप्त अभिलेख भी तैयार किया गया था। अब ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन वेटलैंड’ योजना के लागू होने से इन सभी जलस्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन की उम्मीदें और मजबूत हुई हैं। इस संबंध में प्रभागीय वनाधिकारी गौरव गर्ग ने बताया कि यह योजना न केवल जल संरक्षण बल्कि जैव विविधता, वन्यजीव सुरक्षा और स्थानीय आजीविका को भी मजबूती प्रदान करेगी।
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