बरेली में भाजपा विधायक डॉ. श्याम बिहारी लाल की शुक्रवार को अचानक मौत हो गई। विधायक श्याम बिहारी सर्किट हाउस में थे। पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह मीटिंग ले रहे थे। दोपहर करीब सवा 2 बजे अचानक विधायक की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें सीने में तेज दर्द उठा। वे सीना पकड़कर बैठ गए। पसीना छूटने लगा। यह देख मीटिंग में अफरा-तफरी मच गई। विधायक को उनके सहयोगियों ने तत्काल मेडिसिटी हॉस्पिटल पहुंचाया। यह हॉस्पिटल सर्किट हाउस से करीब 7 किमी और विधायक के घर शक्तिनगर से महज 100 मीटर की दूरी पर है। डॉक्टरों ने विधायक को CPR दिया। वेंटिलेटर पर रखा। लेकिन उनकी तबीयत बिगड़ती चली गई और करीब 3 बजे मौत हो गई। विधायक ने एक जनवरी को अपना 60वां जन्मदिन मनाया था। विधायक का पार्थिव शरीर उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया। क्षेत्र व प्रदेश के कई नेता पहुंचे। अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ आज 3 जनवरी, शनिवार को दोपहर 12 बजे बरेली में किया जाएगा। सीएम योगी विधायक के निधन पर शोक प्रकट करने आएंगे। सांसद बोले- हंसी मजाक चल रहा था, तभी आया हार्ट अटैक
भाजपा सांसद छत्रपाल गंगवार ने बताया- मीटिंग बहुत अच्छी थी। मीटिंग के बाद मंत्री धर्मपाल ने सहभोज रखा था। हंसी मजाक चल रहा था। तभी अचानक विधायक श्याम बिहारी को हार्ट अटैक आ गया। परिवार के मुताबिक- विधायक डॉ श्याम बिहारी को 2007 में पहला हार्ट अटैक पड़ा था। दिल्ली के अपोलो अस्पताल में बाईपास सर्जरी हुई थी। तब से इलाज चल रहा था। आज दूसरा अटैक पड़ा, जिसमें उनकी मौत हो गई। दोनों बेटियां अफसर, पत्नी टीचर
डॉ. श्याम बिहारी बरेली में सुरक्षित फरीदपुर विधानसभा सीट से दूसरी बार चुनाव जीतकर विधायक बने थे। फरीदपुर सीट पर कोई नेता लगातार दो बार चुनाव जीता है, लेकिन श्याम बिहारी ने यह मिथ तोड़ा था। परिवार में पत्नी मंजू लता, एक बेटा और दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी शिल्पा ग्वाल, कैंटोनमेंट बोर्ड रक्षा में संपदा अधिकारी है। छोटी बेटी शिवानी ग्वाल, मुंबई RBI में कार्यरत हैं। बेटा ईशान ग्वाल दिल्ली में UPSC की पढ़ाई कर रहा है। पत्नी मंजुलता बेसिक शिक्षा विभाग में टीचर हैं। ABVP से सियासी सफर की शुरुआत की थी
विधायक श्याम बिहारी लाल का जन्म 1 जनवरी 1966 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में हुआ था। उनके पिता का नाम राधेश्याम था। श्याम बिहारी लाल पोस्ट ग्रेजुएट थे। वे पेशे से प्रोफेसर थे। वर्तमान में वे बरेली की महात्मा ज्योतिबा फूले रोहिलखंड यूनिवर्सिटी में प्राचीन इतिहास एवं संस्कृति विभाग के प्रोफेसर और विभागाध्यक्ष थे। इसके अलावा वे पांचाल संग्रहालय के निदेशक भी थे और गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय, नोएडा के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य थे। उन्होंने अपने सियासी सफर की शुरुआत ABVP से की थी। लाइव अपडेट्स के नीचे ब्लॉग में पढ़िए…
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