यूपी के बरेली में किसानों का धैर्य जवाब दे रहा है। आज सत्याग्रह का 18वां दिन है, लेकिन प्रशासन की नींद नहीं टूट रही। महिला थाने के सामने और कमिश्नर ऑफिस से चंद कदमों की दूरी पर देश का पेट भरने वाला अन्नदाता ठिठुरती ठंड में बैठा है। अधिकारियों की चुप्पी ने किसानों के घावों पर नमक छिड़कने का काम किया है। बरेली मंडल के 4 हजार किसानों ने खून-पसीना एक कर 10 हजार क्विंटल गेहूं और धान की फसल उगाई थी, जिसे अब साजिश के तहत ‘गायब’ कर दिया गया है। किसान कई बार कमिश्नर भूपेंद्र एस चौधरी को ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन अब तक ठोस कार्रवाई के नाम पर केवल आश्वासन मिला है। आधी रात को डकैती: गार्ड देखता रहा और ट्रक भर ले गए अनाज यह मामला ‘आर्यधन फाइनेंशियल सॉल्यूशंस’ और ‘आर्या कोलैटरल वेयरहाउसिंग’ नामक कंपनियों की बड़ी धोखाधड़ी से जुड़ा है। किसानों ने बदायूं के बगरैन स्थित बीज विकास निगम के गोदाम में अपना अनाज सुरक्षित रखने के लिए अनुबंध किया था, जिसके लिए हर महीने 53 हजार रुपये सुरक्षा शुल्क भी दिया जा रहा था। आरोप है कि 8 दिसंबर और 15 जनवरी की रात को कंपनी के जिम्मेदारों ने बिना किसी सूचना के गोदाम के ताले तोड़े और 1031 मीट्रिक टन अनाज ट्रकों में भरकर ले गए। जब तक गार्ड ने सूचना दी, तब तक किसानों की करोड़ों की मेहनत लूटी जा चुकी थी। राष्ट्रपति भवन के निर्देश भी बेअसर, पुलिस बता रही ‘सिविल मामला’ किसानों की इस लड़ाई की गूंज दिल्ली तक पहुंच गई है। किसान आंदोलन समिति की याचिका पर राष्ट्रपति भवन ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद स्थानीय पुलिस इसे ‘सिविल नेचर’ का मामला बताकर पल्ला झाड़ रही है। किसान अब इस पूरे घोटाले की SIT (विशेष जांच दल) से जांच कराने की मांग कर रहे हैं। बरेली आदर्श एग्रीटेक और शुभ कीर्ति प्रोड्यूसर कंपनी से जुड़े छोटे किसानों का कहना है कि यह चोरी नहीं बल्कि खुली डकैती है, जिस पर प्रशासन मौन है। कर्ज के बोझ तले दबे किसान, अब बच्चों की पढ़ाई और शादी पर संकट सत्याग्रह पर बैठे डॉ. हरीश कुमार गंगवार और विपिन पटेल ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि फसल के लिए NBFC कंपनियों से 90% कर्ज लिया गया था। अनुबंध के अनुसार समय होने के बावजूद कंपनी ने धोखे से माल उठा लिया। अब हालत यह है कि किसानों के पास बच्चों की स्कूल फीस और शादियों के लिए पैसे नहीं बचे हैं। इस आर्थिक लूट ने हजारों परिवारों को सड़क पर ला खड़ा किया है। सियासी गलियारों में हलचल, दोषियों पर FIR की मांग इस आंदोलन को अब राजनीतिक समर्थन भी मिलने लगा है। किसानों ने राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी व्यथा भेजी है। शिकायत में आनंद चंद, मार्गपुरी प्रसन्ना राव और वैधेही रवींद्रन जैसे निदेशकों को नामजद किया गया है। किसानों का संकल्प साफ है-जब तक लूटा गया एक-एक दाना वापस नहीं मिलता और दोषियों को जेल नहीं होती, गांधी पार्क में यह सत्याग्रह जारी रहेगा।
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