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बरेली दंगे में हथियार सप्लाई करने वाले शातिर अरेस्ट:बरेली दंगे में पुलिस पर हमले के लिए तौकीर रजा के करीबियों ने मंगवाए थे घातक हथियार

यूपी के बरेली में 26 सितंबर को हुए सांप्रदायिक बवाल और दंगों को लेकर एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। बरेली की बहेड़ी थाना पुलिस ने एक ऐसे अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने दंगों के दौरान भीड़ को अवैध असलहे उपलब्ध कराए थे। पुलिस ने इस गिरोह के दो सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया है, जिनके पास से 5 अवैध पिस्टल (32 बोर), 2 तमंचे और 36 जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं। जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि हथियारों का इस्तेमाल दंगों के दौरान पुलिस बल पर फायरिंग करने के लिए किया गया था। इस पूरी साजिश के तार मौलाना तौकीर रजा को शरण देने वाले फरहत अली और उसके भाई इशरत अली से जुड़े हुए हैं। शेरगढ़ बस स्टैंड पर घेराबंदी: कार की तलाशी में मिला मौत का सामान एसपी नॉर्थ मुकेश चंद्र मिश्रा और सीओ अरुण कुमार के नेतृत्व में बहेड़ी पुलिस ने मुखबिर की सटीक सूचना पर शेरगढ़ बस स्टैंड के पास चेकिंग अभियान चलाया था। इसी दौरान एक संदिग्ध स्विफ्ट कार (UP 25 BP 0824) को रोका गया। कार की तलाशी लेने पर पुलिस की आंखें फटी रह गईं। कार के भीतर से भारी मात्रा में अत्याधुनिक अवैध पिस्टल और कारतूस मिले। पुलिस ने मौके से तसलीम (32) पुत्र जमील अहमद और सोमू खान उर्फ औसाफ (36) पुत्र बबलू खान को गिरफ्तार किया। पकड़े गए दोनों आरोपी बहेड़ी और शेरगढ़ क्षेत्र के रहने वाले हैं और लंबे समय से अवैध हथियारों की तस्करी में लिप्त थे। वीडियो कॉल पर होती थी हथियारों की तस्दीक: तौकीर रजा के करीबियों का हाथ पूछताछ में पकड़े गए आरोपी सोमू खान ने कुबूल किया है कि वह हिस्ट्रीशीटर इशरत अली और उसके सगे भाई फरहत अली के इशारे पर काम करता था। उसने बताया कि 26 सितंबर 2025 को दंगे के दौरान उसने फरहत और इशरत के कहने पर ही झुमका तिराहे पर अवैध हथियारों की बड़ी खेप पहुंचाई थी। सोमू ने खुलासा किया कि इशरत अली ने जिस व्यक्ति को हथियार लेने भेजा था, उसकी पहचान सुनिश्चित करने के लिए बाकायदा वीडियो कॉल की गई थी। पुलिस को सोमू के फोन से इस वीडियो कॉल के लॉग्स और कुछ ऐसे वीडियो भी मिले हैं, जिनमें मास्टरमाइंड इशरत अली खुद अवैध पिस्टल से टेस्ट फायर करता हुआ दिखाई दे रहा है। 5 एन्क्लेव में बैठकर रची गई थी दंगे की पटकथा: जांच में आई नई कड़ियां पुलिस की जांच में यह साफ हुआ है कि जब बरेली दंगों की आग में जल रहा था, तब मुख्य आरोपी मौलाना तौकीर रजा फरहत अली के घर ‘5 एन्क्लेव’ में बैठकर पूरी घटना की निगरानी कर रहा था। फरहत अली वही व्यक्ति है जिसे दंगे की विवेचना के दौरान तौकीर रजा को पनाह देने के आरोप में पहले ही जेल भेजा जा चुका है। अब उसके भाई इशरत अली का नाम सामने आने से यह स्पष्ट हो गया है कि यह केवल अचानक भड़का दंगा नहीं था, बल्कि पुलिस पर हमला करने के लिए हथियारों का पहले से इंतजाम किया गया था। पुलिस अब उस व्यक्ति की तलाश कर रही है जिसने झुमका तिराहे पर सोमू से हथियारों की डिलीवरी ली थी। अपराध की दुनिया के पुराने खिलाड़ी: आरोपियों का लंबा आपराधिक इतिहास इस मामले में शामिल सभी आरोपियों का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है। गिरफ्तार अभियुक्त तसलीम के खिलाफ बहेड़ी थाने में आर्म्स एक्ट और मारपीट के गंभीर मामले दर्ज हैं। वहीं, सोमू खान उर्फ औसाफ पर शेरगढ़ और कोतवाली थाने में हत्या (धारा 302), हत्या की साजिश और दंगे से संबंधित कई संगीन मुकदमे चल रहे हैं। वांछित आरोपी और मुख्य साजिशकर्ता इशरत अली बहेड़ी थाने का कुख्यात हिस्ट्रीशीटर (HS-58A) है, जिस पर गैंगस्टर एक्ट, गौवध निवारण अधिनियम, और आर्म्स एक्ट सहित करीब 9 मुकदमे दर्ज हैं। इसी तरह फरार आरोपी गफ्फार, जो कि किच्छा (उत्तराखंड) का रहने वाला है, उस पर हत्या के प्रयास (307) और दुष्कर्म (376D) जैसी धाराओं में 9 से अधिक मामले दर्ज हैं। फरहत अली पर भी बरेली के विभिन्न थानों में दंगों और हिंसा से संबंधित करीब 10 मुकदमे दर्ज हैं। उत्तराखंड तक फैला है नेटवर्क: किच्छा के प्रधान को दी जानी थी सप्लाई बरामदगी के दौरान यह भी पता चला कि आज जो हथियार बरामद हुए हैं, उन्हें उत्तराखंड के उधमसिंह नगर जिले के किच्छा स्थित गांव दरऊ के प्रधान गफ्फार और उसके साथी समीर को सप्लाई किया जाना था। इशरत अली ने ही अपने गुर्गों को ये पिस्टलें देकर किच्छा भेजी थीं। पुलिस ने इस मामले में गफ्फार और समीर को भी वांछित घोषित कर दिया है। बरेली पुलिस अब उत्तराखंड पुलिस के संपर्क में है ताकि इस अंतरराज्यीय सिंडिकेट की कमर तोड़ी जा सके। एसआईटी की टीम भी इस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है ताकि दंगों में प्रयुक्त अन्य हथियारों का भी पता लगाया जा सके। क्रिमिनल रिकॉर्ड: एक नजर में अभियुक्त तसलीम (गिरफ्तार): तसलीम के खिलाफ थाना बहेड़ी में मुख्य अपराध संख्या 122/2026 के तहत आर्म्स एक्ट और बीएनएस की धाराओं में मुकदमा दर्ज है। इसके अलावा वर्ष 2018 में उस पर मारपीट और धमकी देने (323, 325, 504, 506 भादवि) का भी एक मामला दर्ज हुआ था। अभियुक्त सोमू खान उर्फ औशाफ (गिरफ्तार): सोमू का रिकॉर्ड काफी खतरनाक है। उस पर थाना शेरगढ़ में हत्या और साजिश (302, 120-B) का मुकदमा दर्ज है। कोतवाली और शेरगढ़ थाने में दंगे, हमले और बीएनएस की नई धाराओं के तहत भी 3 अन्य मामले दर्ज हैं। कुल मिलाकर उस पर 4 बड़े आपराधिक मुकदमे हैं। इशरत अली (वांछित मास्टरमाइंड): यह थाना बहेड़ी का हिस्ट्रीशीटर है। इस पर लूट की योजना (399, 402), आर्म्स एक्ट के कई मामले, गौवध अधिनियम, गैंगस्टर एक्ट और मारपीट के कुल 9 मुकदमे दर्ज हैं। यह बरेली और आसपास के जिलों में अवैध हथियारों का बड़ा सप्लायर माना जाता है। गफ्फार (वांछित – उत्तराखंड): किच्छा निवासी गफ्फार पर हत्या के प्रयास (307), धोखाधड़ी (420), दुष्कर्म (376D) और गुंडा एक्ट सहित कुल 9 मुकदमे दर्ज हैं। यह उत्तराखंड और यूपी के सीमावर्ती इलाकों में आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देता है। फरहत अली (वांछित): फरहत अली पर दंगों से संबंधित मुकदमों की भरमार है। बरेली के कोतवाली, बारादरी और कैंट थानों में उस पर हत्या के प्रयास, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और आपराधिक साजिश रचने के 10 मुकदमे दर्ज हैं। एसपी नॉर्थ मुकेश चंद्र मिश्रा का बयान “बहेड़ी पुलिस ने एक अंतरराज्यीय गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार कर बरेली दंगों की एक बड़ी साजिश का खुलासा किया है। इनके पास से बरामद अवैध पिस्टल और कारतूसों का सीधा संबंध 26 सितंबर को हुई हिंसा से है। पूछताछ में यह पुख्ता हुआ है कि फरार आरोपी इशरत अली और जेल में बंद फरहत अली ने दंगाइयों को हथियार मुहैया कराए थे ताकि पुलिस बल को निशाना बनाया जा सके। आरोपियों के मोबाइल से मिले वीडियो और डिजिटल साक्ष्य इस बात की पुष्टि करते हैं। एसआईटी और पुलिस की टीमें फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही हैं, जल्द ही उन्हें भी सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।”


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