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बजट 2026 कर अनुपालन आसान, दरे स्थिर:सीए बोले-सरकार का टैक्स पर विवाद कम करने पर दिया जोर

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में बजट 2026 पेश किया था। इस बजट के बाद आम आदमी यह गुणा-भाग लगाने में जुटा है कि आखिर उसकी जेब पर क्या असर पड़ा है। बजट में सरकार ने टैक्स नियमों को सरल बनाने से लेकर रोजमर्रा की चीजों के दाम घटाने तक कई ऐसे फैसले लिए हैं। जिसे सीए मोहन कुकरेजा ने आसान भाषामें में बताया है। नया टैक्स कानून और आसान प्रक्रिया कुकरेजा ने बताया-सरकार की मुख्य मंशा पेनल्टी से फीस की ओर, नोटिस से स्व पालन की ओर, और कानूनी विवाद की जगह समझौते की ओर बढ़ने की है। वित्त विधेयक 2026 में आयकर की दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है, सरकार का फोकस कर बढ़ाने के बजाय कर अनुपालन को आसान बनाने पर है। कर्मचारी PF/ESIC जमा पर बड़ी राहत देते हुए अब कर्मचारी अंशदान अगर रिटर्न दाख़िल करने की अंतिम तिथि तक जमा कर दिया जाए तो आयकर में कटौती मिलेगी। मोटर दुर्घटना मामलों में मिलने वाले मुआवज़े पर ब्याज को पूरी तरह कर-मुक्त कर दिया गया है और उस पर TDS भी नहीं कटेगा। नॉन-ऑडिट व्यापारियों और पेशेवरों के लिए रिटर्न की अंतिम तिथि 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त की गई है। संशोधित रिटर्न के लिए ज़्यादा समय देते हुए अब संशोधित रिटर्न 9 महीने की जगह 12 महीने तक दाख़िल किया जा सकेगा। यह विधेयक दंडात्मक कर व्यवस्था से आगे बढ़कर “स्वैच्छिक अनुपालन और विवाद कम करने” की सोच को दर्शाता है। बजट का सबसे बड़ा और दूरगामी फैसला इनकम टैक्स कानून में बदलाव का है। वित्त मंत्री ने एलान किया है कि 1 अप्रैल 2026 से देश में एक नया और बेहद सरल नियम लागू किया जाएगा। अब ‘इनकम टैक्स एक्ट 2025’ को मंजूरी दे दी गई है। इसका मकसद टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की प्रक्रिया को इतना आसान बनाना है कि आम आदमी बिना किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट की मदद के भी अपना टैक्स भर सके। सरकार का मानना है कि पुराने और जटिल कानूनों की वजह से लोगों को समय पर रिटर्न भरने में दिक्कत होती थी, जिसे अब खत्म किया जाएगा। यह फैसला आने वाले समय में आपकी ITR फाइलिंग के अनुभव को पूरी तरह बदल देगा। टैक्स जमा करते समय कई बार अनजाने में गलती हो जाती है, जिसे लेकर लोगों के मन में हमेशा डर बना रहता था। बजट 2026 में इस डर को खत्म कर दिया गया है। सरकार ने फैसला किया है कि अब इनकम टैक्स छिपाने या हिसाब-किताब में गड़बड़ी मिलने पर किसी को जेल की सजा नहीं होगी। ऐसे मामलों को अब सिर्फ जुर्माना भरकर निपटाया जा सकेगा। यह कदम छोटे व्यापारियों और वेतनभोगी वर्ग के लिए बहुत बड़ी राहत है, क्योंकि अब वे बिना किसी कानूनी पचड़े के डर के अपना काम कर सकेंगे।


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