काशी हिंदू विश्वविद्यालय में कृषि विज्ञान संस्थान के आनुवंशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन क्लाइमेट रेजिलिएंट एग्रीकल्चर फार सस्टेनेबल डेवलपमेंट इनोवेशन एंड सोल्यूशन विषय पर 5 से 7 फरवरी 2020 को स्वतंत्रता भवन में आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीक चावल अनुसंधान संस्थान (३री) फिलीपींस एक तकनीकी सह आयोजक के रूप में सहयोग कर रहा है। इस सम्मेलन के संयोजकत था आनुवांशिकी एवं पादप प्रजनन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर श्रवण कुमार सिंह के अनुसार इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य वैश्चिक स्तरपर वैज्ञानिकों एवं नीति निर्धारकों का ध्यान आकर्षण कराना है कि किस प्रकार जलवायु परिवर्तत की स्थिति में कृषि का सतत विकास किया जा सके। 24 राज्य और 5 देश के वैज्ञानिक आयेंगे इरी की डॉ स्वाती नायक सह संयोजक हैं आयोजन सचिव डॉ ने जोर्बन ने बताया कि इसमें देश के 24 राज्यों तथा 4 से 5 अन्य देशों के 500 से अधिक वैज्ञानिक अध्यापक, फार्मर प्रोड्यूसर ओर्गनाइजेशन शोधार्थी इत्यादि भाग ले रहे हैं। यह अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन विश्व के प्रमुख कृषि विशेषज्ञों प्रख्यात वैज्ञानिको, नीति निर्माताओं कृषि उद्यमियों युवा शोधकर्ताओं तथा शोधार्थियों के लिए 21 वीं सदी की सबसे बड़ी चुनौती जलवायु परिवर्तन की स्थिति में विश्व खाप पोषण पर परिचर्चा हेतु एक वैश्विक मंच दे रहा है। 5 फरवरी को होगी शुरुआत कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक प्रोफेसर यूपी सिंह ने बताया कि इस सम्मेलन का उद्घाटन समारोह 5 फरवरी 2020 को सुबह 9:30 बजे होगा, जिसकी अध्यक्षता कुलपति प्रोफेसर अजित कुमार चतुर्वेदी करेंगे। समारोह के मुख्य अतिथि हो हिमांशु पाठक, महानिदेशक अंतर्राष्ट्रीय अर्थ शुष्क क्षेत्र फसल अनुसंधान संस्थान (इक्रीसैट) हैदराबाद होगे तथा इसके सम्मानित अतिथियों में पद्मभूषण प्रोफेसर रामबदन सिंह तथा बीएचयू के पूर्व कुलपति प्रोफेसर पंजाब सिंह हैं। बीएचयू ने 15 साल में तैयार की सरसो की नई प्रजाति प्रोफेसर एसके सिंह ने बताया कि, वह 2006 में प्रोफेसर बनकर BHU आए थे, तब से ही उनकी ख्वाहिश थी कि बीएचयू में सरसों की वैरायटी को तैयार किया जाए जो न सिर्फ किसानों की उपज को बढ़ाए बल्कि तिलहन के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम के रूप में भी देखा जाए। इसी क्रम में 2025 में काशी हिंदू विश्वविद्यालय की पहली मस्टर्ड वैरायटी मालवीय निधि वैज्ञानिकों के द्वारा तैयार की गई। वह बताते हैं कि, यह हाईएस्ट ब्रीडिंग है. अभी तक उत्तर प्रदेश के लिए जो भी वैरायटी बनी है, उससे 10 से 12 फीसदी यह ऊपज ज्यादा दे रहा है और तेल की मात्रा भी इसमें 39 से 40 फ़ीसदी है। वो कहते हैं कि,यूपी में इससे तिलहन का उत्पादन बढ़ेगा। पीएम मोदी भी ऑयल सीड को लेकर जिक्र कर चुके है कि तिलहन की उपज बढ़ना चाहिए, ऐसे में BHU का यह नया मालवीय निधि सरसों की वैरायटी उपज दलहन के लिए क्रांतिकारी साबित होगा। इन बिन्दुओं पर होगी चर्चा • जलवायु अनुकूल फसल किस्मों को तैयार करने हेतु प्रभावी तकनीकी • फसल सुधार हेतु जैव विविधता का संरक्षण • मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन एवं जल संरक्षित खेती • स्मार्ट कृषि प्रणाली में ए.आई ड्रोन, रिमोट सेंसिंग तथा नैनो टेक्नोलॉजी का उपयोग • गुणवत्ता युक्त संकर बीजों में सुधार • पशुधन उत्पादन में सतत विकास तथा बेस्टरी साइकिलिंग हेतु रणनीतियां • कृषि एवं बागवानी फसलों में पोषण गुणवता बढाना
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