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फफूंद-कोंच, इटावा-बिंदकी रेलमार्ग को बजट में कुछ नहीं:सर्वे के बावजूद औरैया में रेलवे जंक्शन की उम्मीद टूटी

औरैया में फफूंद से कोंच (जालौन) और इटावा से बिंदकी रोड (फतेहपुर) तक प्रस्तावित रेलमार्गों को इस बार के केंद्रीय बजट में कोई आवंटन न मिलने से स्थानीय लोगों में निराशा है। इन दोनों रेल लाइनों का सर्वे करीब एक दशक पहले हो चुका है, जिसमें औरैया को एक महत्वपूर्ण रेलवे जंक्शन के रूप में प्रस्तावित किया गया था। फफूंद-कोंच रेलमार्ग के सर्वे में औरैया स्टेशन को मंडी के समीप प्रस्तावित किया गया था। यह 70 किलोमीटर लंबा रेलमार्ग फफूंद से औरैया होते हुए जालौन के कोंच तक जाना है। इस मार्ग का सर्वे कार्य वर्ष 2014 में दूसरी बार कराया गया था। इसी तरह, अगस्त 2016 में बिंदकी रोड (फतेहपुर) से इटावा तक रेलवे सर्वे का कार्य संपन्न हुआ था। इस रेलमार्ग पर बाबरपुर, अजीतमल, औरैया, सिकंदरा, राजपुर, सट्टी, भोगनीपुर, मूसानगर, घाटमपुर, जहानाबाद और बिंदकी रोड जैसे रेलवे स्टेशन प्रस्तावित किए गए थे। सर्वे रिपोर्ट में औरैया को रेलवे जंक्शन बनाने की सिफारिश की गई थी, लेकिन रेलवे बोर्ड ने अभी तक इस पर मुहर नहीं लगाई है। इन रेलमार्गों के बनने से औरैया क्षेत्र के व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। औरैया की पहचान प्रदेश भर में शुद्ध घी की मंडी के रूप में है। इसके अतिरिक्त, खाद्यान्न, दलहन और तिलहन का कारोबार भी इन रेल लाइनों से और अधिक विकसित हो सकता है। वरिष्ठ साहित्यकार मुनीश त्रिपाठी ने इन रेल लाइनों को व्यापार वृद्धि के लिए अत्यंत आवश्यक बताया। समाजसेवी अश्विनी शर्मा ने कहा कि इन परियोजनाओं से कई जिलों को लाभ मिलेगा। वरिष्ठ पत्रकार मनोज दुबे ने कई बार के सर्वे और जांच का जिक्र करते हुए उम्मीद जताई कि सरकार भविष्य में इस पर विचार करेगी, क्योंकि प्राथमिक स्तर पर बजट भी जारी हुआ था। फफूंद से जालौन-कोंच तक रेल पटरियां बनाई जाएं और बाबरपुर, अजीतमल, सिकंदरा, राजपुर, सट्टी, भोगनीपुर, मूसानगर, घाटमपुर, जहानाबाद और बिंदकी रोड स्टेशनों को मिलाकर औरैया स्टेशन पर जंक्शन बनाया जा सकता है। इन रेल लाइनों से औरैया के घी, दलहन, तिलहन के कारोबारियों को मदद मिलेगी और इससे किसानों के साथ-साथ आम व्यापारियों को भी फायदा होगा। इटावा से बिंदकी के बीच रेल मार्ग के संचालन से औरैया के साथ इटावा, बकेवर, पुखरायां जैसे स्थान भी जुड़ जाएंगे और कानपुर से ट्रेनों पर भी दबाव कम होगा।


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