प्रयागराज में ब्राह्मण समाज की छवि को धूमिल करने वाली फिल्म “घूसखोर पंडित” के विरोध में शनिवार को ब्राह्मण समाज के विभिन्न संगठनों और नेताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने फिल्म पर सनातन धर्म, ब्राह्मण समाज और उसके नैतिक मूल्यों को गलत ढंग से प्रस्तुत करने का आरोप लगाया। प्रदर्शन के दौरान समाज सेवी हरि कृष्ण शुक्ला ने कहा कि ब्राह्मण की पहचान सदैव नैतिकता, त्याग, तप, ज्ञान और “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना से जुड़ी रही है। उन्होंने शास्त्रों का हवाला देते हुए कहा कि ब्राह्मण का चरित्र “मातृवत् परदारेषु, परद्रव्येषु लोष्टवत्, आत्मवत् सर्वभूतेषु” जैसे आदर्शों पर आधारित है। ऐसे में किसी फिल्म या सीरियल के माध्यम से पूरे समाज को चरित्रहीन या भ्रष्ट दिखाना न केवल आपत्तिजनक है, बल्कि सामाजिक सौहार्द को भी नुकसान पहुँचाने वाला है।
ब्राह्मण समाज के नेताओं ने कहा कि यह केवल एक समाज का अपमान नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति और भारत की परंपराओं पर सीधा प्रहार है। वक्ताओं ने सवाल उठाया कि क्या आदि शंकराचार्य, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय, सुभाष चंद्र बोस, सरदार पटेल और चंद्रशेखर आज़ाद जैसे महापुरुषों के आदर्श यही थे, जिन्हें इस तरह के चित्रण से अपमानित किया जा रहा है। ब्राह्मण नेता विष्णुकांत पाण्डेय ने कहा कि हम लोगों ने इस फिल्म को पूरी तरह बैन करने का आग्रह किया है। फिल्म निर्माता, निर्देशक और इसमें काम करने वाले कलाकारों पर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए और उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाए। दोबारा इस तरह की कोई भी बेतुकी फिल्म किसी जाति, धर्म या मजहब के नाम पर न बनाई जाए। हमारा विरोध इसलिए है क्योंकि ब्राह्मण समाज को विशेष रूप से टार्गेट कर इस फिल्म के माध्यम से अपमानित किया जा रहा है। यदि फिल्म पर प्रतिबंध तो लगाया जाता है, लेकिन दोषियों पर कानूनी कार्रवाई नहीं होती, तो हम हर स्तर पर उतरेंगे और हर स्तर पर उग्र विरोध करेंगे तथा हर स्तर पर कार्रवाई की जाएगी।” प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कुछ फिल्म निर्माता और तथाकथित कलाकार जानबूझकर समाज को बांटने का काम कर रहे हैं, जिससे सामाजिक तनाव और अविश्वास बढ़ रहा है।
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