पौष माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा पर शनिवार को डालीगंज स्थित गोमती तट पर मासिक मां गोमती आरती का आयोजन किया गया। ठंड के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस धार्मिक कार्यक्रम में शामिल हुए।यह आयोजन प्राचीन शिवालय श्री मनकामेश्वर मंदिर के महंत देव्यागिरि की अगुवाई में किया गया। उपवन घाट पर 11 वेदियों से मां गोमती की भव्य आरती की गई, जिससे शंख और घंटों की गूंज के साथ दीपों की रोशनी से पूरा घाट जगमगा उठा। श्रद्धालुओं ने मां गोमती का आशीर्वाद प्राप्त किया।आरती से पहले सेवा और स्वच्छता का संदेश दिया गया। सुबह के समय मंदिर के सेवादारों और स्वयंसेवकों ने गोमती नदी की सफाई की। उन्होंने जलकुंभी और अन्य कचरा हटाकर स्वच्छता के प्रति अपने संकल्प को दोहराया। महिलाओं ने सजाया, रंगोली से रंगीन हुआ घाट दोपहर में उपवन घाट को रंगोली से सजाया गया और उसे सुसज्जित किया गया। मंदिर की प्रमुख सेवादार उपमा पांडेय के नेतृत्व में कमलेश यादव, रीना, मधु, रेनू, किरण वर्मा, प्रीति, सुधा, अंजू वर्मा, रेशमा, लज्जावती, ममता, दीपा सोनकर, पूजा यादव, सुमन तिवारी, निर्मला पाठक, सुषमा, सुनीता, गीता जायसवाल और निर्मला मिश्रा सहित कई महिला सेविकाओं ने इस कार्य में सक्रिय सहभागिता की। महिलाओं के उत्थान की प्रेरणा सावित्रीबाई आरती से पूर्व साध्वी गौरजा गिरि ने मंत्रोच्चारण के साथ विधिवत पूजा संपन्न कराई। इसके उपरांत मां गोमती की आरती शुरू हुई, जिसमें दीपों की कतारें सजीं और तट पर भक्तिमय वातावरण छा गया।इस अवसर पर मां शाकम्बरी देवी की पूजा भी की गई। साथ ही, समाज सुधारक और महान शिक्षिका सावित्रीबाई फुले की जयंती मनाई गई। उनकी तस्वीर पर फूल-माला अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। महंत देव्यागिरि ने सावित्रीबाई फुले के अतुलनीय योगदान को याद किया। उन्होंने बताया कि 3 जनवरी 1831 को जन्मी सावित्रीबाई फुले आधुनिक भारत की प्रथम शिक्षिका थीं और देश के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसिपल भी रहीं। महिलाओं की शिक्षा, विधवा विवाह, दीन-दुखियों और अनाथों की सेवा तथा छुआछूत मिटाने में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
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