पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की रिहाई की प्रक्रिया कानूनी औपचारिकताओं और विभिन्न जिलों में दर्ज मुकदमों के कारण लगातार उलझी रही। हालांकि, अब वारंट बी वापस होने के बाद रिहाई की दिशा में तेजी आई है। वाराणसी न्यायालय में जमानत बांड जमा कराए जा चुके हैं, जबकि देवरिया में भी बांड और जमानतदारों की प्रक्रिया पूरी किए जाने की तैयारी है। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही जिला कारागार से उनकी रिहाई संभव हो सकेगी। गिरफ्तारी से शुरू हुई कानूनी प्रक्रिया
पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को 9 और 10 तारीख की मध्य रात्रि में शाहजहांपुर रेलवे स्टेशन के पास चलती ट्रेन से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें देवरिया लाया गया, जहां सदर कोतवाली क्षेत्र में औद्योगिक स्थान केंद्र की भूमि आवंटन से जुड़े धोखाधड़ी और कूट रचना के मामले में न्यायालय में पेश किया गया। सुनवाई के बाद न्यायालय ने उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भेजते हुए देवरिया जिला कारागार भेज दिया, जहां तब से वह निरुद्ध हैं।
गिरफ्तारी के बाद उनके खिलाफ देवरिया के अलावा वाराणसी और लखनऊ में भी दर्ज मुकदमों के चलते कानूनी प्रक्रिया जटिल हो गई। अलग–अलग न्यायालयों में जमानत मिलने के बावजूद सभी मामलों में औपचारिकताएं पूरी न होने के कारण रिहाई टलती रही। अलग–अलग जिलों में जमानत, पर रिहाई नहीं
अमिताभ ठाकुर को सबसे पहले 9 जनवरी को वाराणसी न्यायालय से जमानत मिली। इसके बाद 19 जनवरी को देवरिया जिला जज न्यायालय ने भी कूट रचना और धोखाधड़ी के मामले में उन्हें जमानत दे दी। इस जमानत में एक–एक लाख रुपये के दो बांड और दो जमानतदारों की शर्त रखी गई थी। कानूनी दृष्टि से यह रिहाई की दिशा में बड़ा कदम था, लेकिन इसी दौरान लखनऊ के तालकटोरा थाने में दर्ज एक अन्य मामले में वारंट बी जारी हो गया।
लखनऊ पुलिस द्वारा जारी वारंट बी का पत्र देवरिया जिला कारागार पहुंचते ही रिहाई की पूरी प्रक्रिया ठहर गई। वारंट बी का अर्थ यह था कि यदि किसी एक मामले में रिहाई मिल भी जाती, तो दूसरी एजेंसी तत्काल हिरासत में ले सकती थी। इसी आशंका के चलते अधिवक्ताओं ने जमानतदारों के प्रपत्र और बांड जमा कराने की प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया। वारंट बी बना सबसे बड़ी बाधा
डिस्ट्रिक्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज कुमार मिश्र के अनुसार वारंट बी किसी भी बंदी की रिहाई प्रक्रिया में सबसे बड़ी अड़चन बन जाता है। अमिताभ ठाकुर के मामले में भी यही स्थिति बनी रही। अधिवक्ताओं ने पहले वारंट बी को निरस्त कराने की रणनीति अपनाई। इसके लिए लखनऊ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय में प्रार्थना पत्र दाखिल किया गया। लगातार पैरवी और बहस के बाद 30 जनवरी को सीजेएम न्यायालय ने वारंट बी वापस लेने का आदेश दे दिया। यह आदेश 1 फरवरी को देवरिया जिला कारागार पहुंचा। वारंट बी वापस होते ही कानूनी अड़चन काफी हद तक दूर हो गई और रिहाई की प्रक्रिया में फिर से गति आई। वाराणसी में बांड जमा, देवरिया में तैयारी
वारंट बी हटने के तुरंत बाद अधिवक्ताओं ने जमानत बांड जमा कराने की प्रक्रिया तेज कर दी। 2 फरवरी को वाराणसी न्यायालय में दो जमानतदारों के साथ आवश्यक बांड जमा कराए गए। इससे वाराणसी के मामले में औपचारिकताएं लगभग पूरी हो गईं।
देवरिया में भी इसी क्रम में प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। अधिवक्ता प्रवीण त्रिपाठी के अनुसार अमिताभ ठाकुर के दो जमानतदारों के बांड जिला जज कार्यालय में जमा कराए जाएंगे। इसके बाद स्थानीय स्तर पर जमानतदारों का सत्यापन कराया जाएगा, जिसके लिए पत्रावलियां पुलिस और तहसील प्रशासन को भेजी जाएंगी। सत्यापन के बाद ही मिलेगा रिहाई आदेश
देवरिया में बांड जमा होने के बाद जमानतदारों के पते, संपत्ति और पहचान का सत्यापन अनिवार्य प्रक्रिया है। पुलिस और तहसील से रिपोर्ट आने के बाद न्यायालय अंतिम रिहाई का परवाना आदेश जारी करेगा। यही आदेश जिला कारागार पहुंचेगा, जिसके आधार पर जेल प्रशासन रिहाई की कार्रवाई करेगा।
जेल प्रशासन का कहना है कि बिना पूर्ण और विधिवत आदेश के किसी भी बंदी को रिहा नहीं किया जा सकता। इसलिए सभी न्यायालयों से संबंधित दस्तावेजों का एक साथ पहुंचना आवश्यक है। कानूनी औपचारिकताओं ने बढ़ाई देरी
इस पूरे घटनाक्रम में स्पष्ट हुआ कि बहुस्तरीय न्यायिक प्रक्रिया और अलग–अलग जिलों में दर्ज मुकदमे रिहाई में देरी का मुख्य कारण बने। एक मामले में जमानत मिलने के बावजूद दूसरे जिले के वारंट या आदेश के कारण बंदी को जेल में ही रहना पड़ता है। अमिताभ ठाकुर के मामले में भी यही स्थिति बनी रही। पहले वारंट बी ने प्रक्रिया को रोके रखा, फिर बांड और सत्यापन की औपचारिकताओं ने समय लिया। हालांकि अब अधिकांश बाधाएं दूर हो चुकी हैं और रिहाई की संभावना निकट मानी जा रही हैं। जल्द रिहाई की उम्मीद
अधिवक्ता रितेश मोहन श्रीवास्तव के अनुसार यदि देवरिया न्यायालय में बांड जमा होते हैं और जमानतदार के सत्यापन के लिए तहसील और कोतवाली से सत्यापन की प्रक्रिया समय से पूरी हो जाती है, तो न्यायालय से रिहाई आदेश जारी होने में अधिक समय नहीं लगेगा। आदेश जेल प्रशासन तक पहुंचते ही रिहाई की औपचारिकताएं पूरी कर दी जाएंगी।
इस प्रकार वारंट बी से शुरू हुई देरी अब समाप्ति की ओर है और सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूर्ण होते ही पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर के जेल से बाहर आने की संभावना मजबूत हो गई है। क्रिएटिनिन स्तर बढ़ा, किडनी फंक्शन पर नजर
रविवार को आई जांच रिपोर्ट में अमिताभ ठाकुर के रक्त में क्रिएटिनिन का स्तर सामान्य से अधिक पाया गया है। वरिष्ठ सर्जन डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि सामान्य परिस्थितियों में क्रिएटिनिन का स्तर 0.7 से 1.3 के बीच होना चाहिए, लेकिन उनकी रिपोर्ट में यह इससे अधिक दर्ज किया गया। चिकित्सकीय दृष्टि से बढ़ा हुआ क्रिएटिनिन किडनी की कार्यक्षमता पर प्रभाव का संकेत माना जाता है, इसलिए डॉक्टरों ने विशेष सतर्कता बरतने और आगे की जांच जारी रखने का निर्णय लिया है।
विशेषज्ञों की टीम लगातार रिपोर्टों की समीक्षा कर रही है और आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त परीक्षण भी कराए जा सकते हैं। वहीं जेल प्रशासन भी मेडिकल अपडेट पर नजर बनाए हुए है और डॉक्टरों की सलाह के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मरीज को आराम, दवाएं और नियमित जांच के जरिए उपचार दिया जा रहा है।
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