कूट रचना और धोखाधड़ी के मामलों में देवरिया जिला कारागार में निरुद्ध पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की रिहाई फिलहाल टलती नजर आ रही है। विभिन्न न्यायालयों से जमानत मिलने के बावजूद अब तक सभी आवश्यक रिहाई आदेश जिला कारागार तक नहीं पहुंच पाए हैं, जिसके चलते उनकी रिहाई में तीन से चार दिन की और देरी होने की संभावना जताई जा रही है। इस बीच उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है, जहां चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार जारी है। अस्पताल परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। पुलिस विभाग द्वारा दो शिफ्ट में जवानों की ड्यूटी लगाई गई है, जिसमें प्रत्येक शिफ्ट में एक दरोगा और छह पुलिसकर्मी तैनात हैं। इसके साथ ही मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने भी अतिरिक्त सुरक्षा गार्ड लगा दिए हैं। इस तरह अमिताभ ठाकुर को दो स्तरीय सुरक्षा प्रदान की जा रही है। देवरिया जिला कारागार में नहीं पहुंचा पूर्ण रिहाई आदेश
लखनऊ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) न्यायालय से वारंटी बी वापसी का पत्र देवरिया जिला कारागार पहुंच चुका है, लेकिन वाराणसी में दर्ज मुकदमे से संबंधित रिहाई आदेश अभी जेल प्रशासन को प्राप्त नहीं हुआ है। जेल अधिकारियों का कहना है कि जब तक सभी मामलों में विधिवत और पूर्ण आदेश एक साथ प्राप्त नहीं हो जाते, तब तक किसी भी बंदी को रिहा करना नियमों के विपरीत होगा। पूर्व आईपीएस के अधिवक्ता प्रवीण द्विवेदी ने बताया कि वाराणसी न्यायालय द्वारा जमानत स्वीकृत कर दी गई है तथा जमानतदारों और बांड की प्रक्रिया भी पूरी कर ली गई है। उन्होंने उम्मीद जताई कि बुधवार तक वाराणसी से रिहाई आदेश देवरिया जिला कारागार पहुंच सकता है। इसके बाद देवरिया सदर कोतवाली में दर्ज मुकदमे से संबंधित आदेश अगले दिन गुरुवार तक जेल प्रशासन को भेजे जाने की संभावना है। सभी आदेश एक साथ प्राप्त होने के बाद ही रिहाई की औपचारिकताएं पूरी की जा सकेंगी। जेल प्रशासन का स्पष्ट मत है कि आंशिक आदेश या किसी एक मुकदमे की रिहाई पर्याप्त नहीं होती, बल्कि प्रत्येक मामले में न्यायालय से विधिक प्रक्रिया पूर्ण होना अनिवार्य है। इसी कारण रिहाई की प्रक्रिया तकनीकी रूप से लंबी होती जा रही है। देवरिया मामले में भी शर्तें पूरी होना शेष
अधिवक्ता के अनुसार देवरिया में दर्ज मुकदमे में भी दो जमानतदार और एक–एक लाख रुपये के दो बांड भरवाने की शर्त निर्धारित है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद संबंधित न्यायालय से रिहाई आदेश जारी होगा। इसके बाद ही जेल प्रशासन को अंतिम निर्देश प्राप्त हो सकेगा। कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि बहुस्तरीय न्यायिक प्रक्रियाओं के चलते ऐसे मामलों में विलंब होना सामान्य बात है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि वारंट बी की स्थिति को देखते हुए पहले जमानतदारों के प्रपत्र और बांड जमा नहीं किए गए थे। आशंका जताई जा रही थी कि यदि एक मामले में रिहाई आदेश पहले पहुंच जाता तो वारंट बी के आधार पर दूसरी एजेंसी तत्काल हिरासत में ले सकती थी। हालांकि इस विषय पर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी कानूनी हलकों में यह चर्चा का विषय बना हुआ है।
जेल प्रशासन ने भी स्पष्ट किया है कि बिना पूर्ण और विधिवत दस्तावेजों के किसी भी बंदी को रिहा नहीं किया जा सकता। इसलिए सभी न्यायालयों से आदेश प्राप्त होने की प्रतीक्षा की जा रही है और दस्तावेज उपलब्ध होते ही नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। तबीयत बिगड़ने पर मेडिकल कॉलेज में भर्ती
इधर शनिवार को अमिताभ ठाकुर की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें पेट में तेज दर्द की शिकायत होने पर जेल प्रशासन ने तत्काल उन्हें महर्षि देवरहा बाबा मेडिकल कॉलेज भेजा। वर्तमान में वह मेडिकल कॉलेज के प्रथम तल स्थित सर्जिकल वार्ड–1 के बेड संख्या 50 पर भर्ती हैं। उनका उपचार वरिष्ठ सर्जन डॉ. राकेश कुमार की देखरेख में किया जा रहा है। चिकित्सकों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है। प्रारंभिक परीक्षण के दौरान सीटी स्कैन और क्रिएटिनिन जांच कराने की सलाह दी गई थी, लेकिन शनिवार को तकनीकी कारणों से जांच नहीं हो सकी। रविवार को क्रिएटिनिन टेस्ट कराया गया, जिसकी रिपोर्ट आने के बाद डॉक्टरों ने आगे की चिकित्सा प्रक्रिया तय की। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मरीज की स्थिति फिलहाल स्थिर है, लेकिन सतत निगरानी आवश्यक है। अमिताभ ठाकुर का बढ़ा क्रिएटिनिन का स्तर
रविवार को आई जांच रिपोर्ट में रक्त में क्रिएटिनिन का स्तर सामान्य से अधिक पाया गया। वरिष्ठ सर्जन डॉ. राकेश कुमार के अनुसार सामान्य स्थिति में क्रिएटिनिन का स्तर 0.7 से 1.3 के बीच होना चाहिए, लेकिन रिपोर्ट में यह अपेक्षाकृत अधिक दर्ज किया गया है। चिकित्सकीय दृष्टि से यह संकेत देता है कि किडनी रक्त को पर्याप्त रूप से फिल्टर नहीं कर पा रही है।
डॉक्टरों का कहना है कि पहले दवाओं, तरल पदार्थों और नियंत्रित उपचार के माध्यम से क्रिएटिनिन का स्तर सामान्य करने का प्रयास किया जाएगा, उसके बाद ही सीटी स्कैन जैसी विस्तृत जांचें कराई जाएंगी। यदि स्तर नियंत्रित नहीं हुआ तो उपचार की दिशा में और चिकित्सकीय कदम उठाए जा सकते हैं। फिलहाल उन्हें निरंतर निगरानी में रखा गया है और नियमित परीक्षण किए जा रहे हैं।
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