जौनपुर के पूर्व जिलाधिकारी (DM) दिनेश कुमार सिंह के नाम और फोटो का दुरुपयोग कर साइबर ठगी का एक मामला सामने आया है। अज्ञात साइबर अपराधियों ने उनकी फर्जी फेसबुक आईडी बनाकर लोगों से संपर्क किया और ठगी का प्रयास किया। फर्जी आईडी से मैसेंजर पर लोगों को संदेश भेजे जा रहे हैं। इन संदेशों में पहले अभिवादन और हालचाल पूछा जाता है, फिर मोबाइल नंबर मांगा जाता है। इसके बाद दावा किया जाता है कि उनका एक मित्र, नीरज कुमार, जो भारतीय सीआरपीएफ अधिकारी है, स्थानांतरण के कारण अपना घर और पुराना फर्नीचर बहुत सस्ते दामों पर बेच रहा है। संदेशों में सामान की अच्छी स्थिति का उल्लेख कर जल्दबाजी का माहौल बनाया जाता है। यह तरीका साइबर ठगों का एक जाना-पहचाना पैटर्न है, जिसमें सरकारी अधिकारी और सेना का नाम लेकर लोगों का विश्वास जीता जाता है। पूर्व जिलाधिकारी दिनेश सिंह ने स्पष्ट किया है कि यह प्रोफाइल फर्जी है और उन्होंने लोगों से फेसबुक पर इसकी रिपोर्ट करने का आग्रह किया है। वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय के साइबर क्लब के नोडल अधिकारी डॉ. दिग्विजय सिंह राठौर ने इस संबंध में चेतावनी दी है। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधी अक्सर सरकारी अधिकारियों के फर्जी सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर ऐसी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। सेना या सीआरपीएफ के नाम पर ‘सस्ता सामान’ बेचने की कहानियां अक्सर ठगी का हिस्सा होती हैं। डॉ. राठौर ने सलाह दी कि मोबाइल नंबर साझा करते ही ठग यूपीआई (UPI), लिंक या अग्रिम भुगतान की मांग कर सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति फर्जी अकाउंट के माध्यम से ऑनलाइन संपर्क करके संदेश भेजता है, तो फेसबुक पर रिपोर्ट विकल्प में जाकर शिकायत दर्ज की जा सकती है। इसके अतिरिक्त, cybercrime.gov.in पोर्टल पर भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।
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