लखनऊ स्थित यूपी प्रेस क्लब में मंगलवार को ‘जनतंत्र और मतदान का अधिकार’विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।यह आयोजन साझी दुनिया की ओर से किया गया।कार्यक्रम में देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, चुनाव प्रक्रिया और मताधिकार की भूमिका पर गहन चर्चा की गई। गोष्ठी के मुख्य वक्ता पूर्व चुनाव आयुक्त अशोक लवासा रहे, जबकि प्रसिद्ध विचारक और शिक्षाविद प्रो. निवेदिता मेनन ने साक्षात्कारकर्ता की भूमिका निभाई। कार्यक्रम के दौरान प्रो. निवेदिता मेनन ने अशोक लवासा से उनके चुनाव आयुक्त पद से इस्तीफे को लेकर सवाल किया। इस पर अशोक लवासा ने कहा कि इस विषय से जुड़ी सभी बातें सार्वजनिक मंच पर बताना संभव नहीं है। उन्होंने शायराना अंदाज़ में जवाब देते हुए कहा, यू कोई बेवफा नहीं होता, कुछ तो मजबूरियां रही होंगी साहब। उनके इस उत्तर पर सभागार में मौजूद लोगों ने तालियों के साथ प्रतिक्रिया दी। मतदान का अधिकार नागरिकों की सबसे बड़ी ताकत अशोक लवासा ने अपने वक्तव्य में कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव बेहद जरूरी हैं। मतदान का अधिकार नागरिकों की सबसे बड़ी ताकत है, जिसका सही और निर्भीक उपयोग होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थाओं की स्वतंत्रता लोकतंत्र की आत्मा होती है और इसे बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। ऐसे विमर्श लोकतांत्रिक को मजबूत करते हैं कार्यक्रम के दौरान उपस्थित पत्रकारों, छात्रों और बुद्धिजीवियों ने भी अपने-अपने सवाल पूछे। अशोक लवासा ने सभी प्रश्नों का सहज, स्पष्ट और विवेकपूर्ण तरीके से उत्तर दिया। चर्चा में चुनावी सुधार, संस्थागत पारदर्शिता और मतदाता जागरूकता जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।गोष्ठी की अध्यक्षता प्रो. नदीम हसनैन ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि ऐसे विमर्श लोकतांत्रिक चेतना को मजबूत करते हैं और समाज को सोचने की नई दिशा देते हैं। कार्यक्रम का समापन संवाद और सकारात्मक चर्चा के साथ हुआ।
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