वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय अब अपने छात्रों को प्लास्टिक कोटेड डिग्रियां प्रदान करेगा। यह नई व्यवस्था वर्ष 2023 के बाद स्नातक (UG), परास्नातक (PG) और व्यावसायिक पाठ्यक्रमों में उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों पर लागू होगी। इससे पहले उत्तीर्ण हुए छात्रों को पूर्व की भांति कागज पर मुद्रित डिग्रियां ही मिलेंगी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने उपाधियों को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और छेड़छाड़ से मुक्त बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है। कागज की डिग्रियों के फटने, खराब होने या नष्ट होने की आशंका अधिक रहती है, जबकि प्लास्टिक कोटेड डिग्रियां लंबे समय तक सुरक्षित रहती हैं और दस्तावेजों के संरक्षण में सहायक होंगी। इस नई व्यवस्था से छात्रों को रोजगार, उच्च शिक्षा और विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में आवेदन के दौरान सुविधा मिलेगी। प्लास्टिक कोटेड डिग्री की सत्यता जांचना अपेक्षाकृत आसान होगा, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका कम होगी। इसके साथ ही, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस प्रकार की डिग्रियों को अधिक मान्यता और स्वीकार्यता प्राप्त होती है। परीक्षा नियंत्रक डॉ. विनोद कुमार सिंह ने बताया कि प्लास्टिक कोटेड उपाधि टूटने की स्थिति में भी सुरक्षित रहती है और इसमें किसी भी प्रकार की हेराफेरी संभव नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि उपाधि में एक विशेष गुप्त कोड होता है, जिसे केवल विभागीय स्तर पर ही सत्यापित किया जा सकता है। किसी भी छेड़छाड़ की स्थिति तुरंत पकड़ में आ जाती है।
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