पूर्वांचल के किसानों के लिए संतरा और मुसम्मी की अनुकूल प्रजातियों की खोज आचार्य नरेंद्रदेव कृषि विश्वविद्यालय में की जा रही है। इस शोध का उद्देश्य ऐसी किस्में विकसित करना है जो क्षेत्र की मिट्टी और जलवायु में भरपूर उत्पादन दे सकें। उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय के शोध प्रक्षेत्र पर देश भर से लाई गई 62 विख्यात प्रजातियों की कलमों का रोपण किया गया है। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि एक वर्ष के भीतर यह स्पष्ट हो जाएगा कि पूर्वांचल के लिए कौन सी प्रजातियां सर्वाधिक उपयुक्त हैं। शोध में शामिल अधिकांश प्रजातियां पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना, जैन एरीग्रेशन जलगांव और केंद्रीय नीबू वर्गीय फसल अनुसंधान संस्थान नागपुर, महाराष्ट्र से लाई गई हैं। यह शोध कार्य 2023 में शुरू हुआ था, जिसमें वैज्ञानिक डॉ. जगवीर सिंह और डॉ. कुलदीप पाण्डेय प्रमुख शोधकर्ता हैं। उद्यान एवं वानिकी महाविद्यालय के फल विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. भानु प्रताप ने बताया कि इस शोध का उद्देश्य पूर्वांचल के 27 जिलों जैसे गोरखपुर, वाराणसी, मऊ, आजमगढ़, बस्ती, सिद्धार्थनगर, बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा और बलिया की मिट्टी की जांच करना है। डॉ. भानु प्रताप के अनुसार, विश्वविद्यालय की ऊसर भूमि में जो पौधा उत्पादन के लिए योग्य पाया जाता है, वह आसपास के सभी जिलों की मिट्टी में भी सफल होता है। शोध से प्राप्त सफल प्रजातियों को विश्वविद्यालय के सभी 27 कृषि विज्ञान केंद्रों पर रोपण के लिए भेजा जाएगा, जहां से कलम तैयार कर किसानों को उपलब्ध कराई जाएगी। यह शोध कार्य विश्वविद्यालय के मद से शुरू किया गया है, जिस पर लगभग पांच लाख रुपये खर्च होंगे। संतरा और मुसम्मी के अतिरिक्त, नींबू और ग्रेपफ्रूट की प्रजातियों का ट्रायल भी चल रहा है। इनमें नागपुर संतरा, डब्ल्यू मर्कोट, ब्लड रेड (संतरा समूह); जेएस ओ एक, दो व तीन (मुसम्मी समूह); फ्लेम कटर वैलेन्सिया (ग्रेपफ्रूट समूह); और कागजी नींबू एसिड लाइम, बारामासी नींबू व पंत कलम नींबू (नींबू समूह) सहित कई प्रमुख पौधों की कलमों का रोपण कर परीक्षण किया जा रहा है।
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