आमतौर पर सर्वाइकल कैंसर या HPV वायरस से महिलाएं ज्यादा पीड़ित होती हैं। सबसे ज्यादा घातक और जानलेवा कैंसरों में इनका नाम आता है, लेकिन ऐसा नहीं है कि पुरुष इन कैंसर से अछूते हैं। पुरुषों में भी ये कैंसर हो रहे हैं। यही कारण है कि महिलाओं के साथ पुरुषों को भी इसके वैक्सीनेशन के लिए कहा जा रहा है। ये कहना है लखनऊ की गायनेकोलॉजिकल ऑन्कोसर्जरी की कंसल्टेंट डॉ. चंद्रिमा रे का। वर्ल्ड कैंसर डे पर वह कहती हैं कि शहरी इलाकों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं होने के बावजूद उत्तर प्रदेश में सर्वाइकल कैंसर की पहचान अब भी देर से हो रही है। खासतौर पर लखनऊ जैसे शहरों में यह एक गंभीर जनस्वास्थ्य समस्या बनी हुई है। पढ़िए डॉ. रे ने जो कहा… रिसर्च में हुए हैं चौकानें वाले खुलासे फेडरेशन ऑफ ऑब्सटेट्रिक्स एंड गायनीलॉजिकल सोसाइटीज ऑफ इंडिया (FOGSI-2025) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में महिलाओं में होने वाले HPV से जुड़े कैंसर मामलों में सर्वाइकल कैंसर की हिस्सेदारी 87.6% है। इन मामलों में उत्तर प्रदेश का हिस्सा काफी बड़ा है, जिसमें शहरी क्षेत्रों की संख्या भी अधिक है। गलतफहमियां हैं देरी की मुख्य वजह डॉ.चंद्रिमा रे ने बताया कि जानकारी की कमी, डर और गलतफहमियां देर से जांच की मुख्य वजह हैं। उन्होंने कहा कि अच्छे अस्पताल और जांच सुविधाएं उपलब्ध होने के बावजूद कई महिलाएं नियमित स्क्रीनिंग से बचती हैं। पैप स्मीयर जांच को लेकर दर्द होने की गलत धारणा है। मानसिक और आर्थिक बोझ का डर भी रहता है। कामकाजी महिलाएं समय पर जांच न करा पाने के ज्यादा जोखिम में रहती हैं। शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं महिलाएं डॉ. रे ने कहा कि काम का दबाव और घर की जिम्मेदारियों के कारण बचाव से जुड़ी स्वास्थ्य जांच पीछे रह जाती है। कई महिलाएं शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं। या उन्हें गलत समझ लेती हैं, जिससे वे बीमारी बढ़ने पर ही डॉक्टर के पास पहुंचती हैं। चिकित्सकीय दिशा-निर्देशों के अनुसार, 21 साल की उम्र से सर्वाइकल कैंसर की जांच शुरू कर देनी चाहिए, चाहे महिला का यौन इतिहास कुछ भी हो। 21 से 29 साल की महिलाओं को हर 3 साल में पैप स्मीयर जांच करानी चाहिए। इसके बाद पैप स्मीयर और एचपीवी टेस्ट दोनों हर 3 साल में कराना बेहतर माना जाता है। शुरुआती लक्षण हल्के होते हैं सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती लक्षण अक्सर हल्के होते हैं। आसानी से नजरअंदाज हो जाते हैं। डॉ. चंद्रिमा रे के अनुसार, पीरियड्स के बीच संबंध के बाद या मेनोपॉज के बाद असामान्य ब्लीडिंग सबसे आम चेतावनी संकेत है। डॉक्टरों को अब लगातार पानी जैसा या बदबूदार डिस्चार्ज, पेल्विक दर्द या कमर के निचले हिस्से में दर्द के मामले भी अधिक देखने को मिल रहे हैं। खासकर कम उम्र की महिलाओं में। डॉ.चंद्रिमा रे ने बताया कि OPD में आने वाले सर्वाइकल कैंसर के 50% से ज्यादा मरीज देर से स्टेज में सामने आते हैं। उन्होंने कहा कि जागरूकता, नियमित जांच और वैक्सीनेशन की तुरंत जरूरत है। सर्वाइकल कैंसर काफी हद तक रोका जा सकता है। लड़कों को भी देनी होगी वैक्सीन डॉ. रे ने बताया कि पुरुष भी HPV के कैरीयर हो सकते हैं और बिना किसी लक्षण के इसे आगे फैला सकते हैं। जब लड़कों को वैक्सीन दी जाती है, तो वे न सिर्फ खुद सुरक्षित रहते हैं, बल्कि वायरस के फैलाव की चेन भी टूट जाती है। इससे महिलाओं में संक्रमण और कैंसर का खतरा कम होता है। इसे हर्ड इम्युनिटी कहते हैं। जब ज्यादा लोग सुरक्षित होते हैं, तो पूरा समाज सुरक्षित होता है। लड़कों के लिए भी HPV खतरनाक है डॉ. रे कहती हैं कि HPV सिर्फ महिलाओं की समस्या नहीं है। यह पुरुषों में भी गले और प्राइवेट पार्टस के कैंसर का कारण बन सकता है। वैक्सीन लड़कों को इन खतरों से भी बचाती है। ऐसे में अवेयरनेस पर फोकस करना बेहद जरूरी हैं। वैक्सीन से मिलती हैं सुरक्षा अब तक HPV वैक्सीन का जोर लड़कियों पर था, क्योंकि सर्वाइकल कैंसर सीधे तौर पर उन्हें प्रभावित करता हैं। वैक्सीन 9 से 14 साल की उम्र में सबसे ज्यादा असरदार होती हैं, खासकर तब जब बच्चा यौन रूप से सक्रिय न हुआ हो। रिसर्च बताती है कि HPV वैक्सीन से 90% तक सर्वाइकल कैंसर रोका जा सकता है। सर्वाइकल कैंसर और HPV में ये हैं कनेक्शन सर्वाइकल कैंसर की सबसे बड़ी वजह है HPV यानी ह्यूमन पैपिलोमा वायरस। यह 200 से ज्यादा तरह के वायरस का समूह है। इनमें से कुछ “हाई-रिस्क” टाइप होते हैं, जो लंबे समय तक शरीर में रहने पर कैंसर का कारण बन सकते हैं। HPV जब लंबे समय तक शरीर में बना रहता है, तो यह गर्भाशय ग्रीवा (सर्विक्स) की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगता है। धीरे-धीरे ये बदलाव कैंसर में बदल सकते हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि शुरुआत में सर्वाइकल कैंसर के कोई साफ लक्षण नहीं होते हैं।
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