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पीयूष मिश्रा के गानों से सजी BLF की अंतिम निशा:संघर्ष के दिनों के गाने; वो पुराने दिन पर झूमे श्रोता, गाया – रोटी नहीं है घर में सब्जी नहीं है पर व्हिस्की तो बेहिसाब

वाराणसी में चल रहे बनारस लिट फेस्ट की अंतिम शाम को संगीतकार, गायककार और अभिनेता पीयूष मिश्रा ने अपने सुरों से संजोया। पीयूष मिश्रा के इस कंसर्ट को सुनने के लिए हजारों युवा पहुंचे थे। जिन्हे गेट पर रोका गया जहां होटल कर्मियों और पुलिस ने उनके साथ अभद्रता की। जगह की कमी की वजह से उन्हें बाहर ही रोक दिया। नदेसर ताज होटल में BLF की अंतिम निशा में पीयूष मिश्रा का कार्यक्रम डेढ़ घंटा विलम्ब से शुरू हुआ। जिसे सुनने के लिए 5 हजार लोग अंदर कंसर्ट स्थल पर मौजूद रहे। देखिये पीयूष मिश्रा के कंसर्ट से जुडी तीन तस्वीरें … हारमोनियम लेकर खड़े हुए तो तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजा हाल पीयूष मिश्रा मंच पर पहुंचे तो पूरा कंसर्ट स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। पीयूष मिश्रा को सुनने के लिए युवाओं का जोश देखते ही बनता था। पीयूष मिश्रा ने अपने कंसर्ट की शुरुआत दूरदर्शन के दौर के गीत से की जिसे उन्होंने कई नाटकों में गाय और ख्याति प्राप्त की। श्रोता इस गाने में मंत्रमुग्ध दिखे और उनके हर शब्द का जवाब देते दिखाई दिए थोड़ा नजारा चटपट बातें से दिखाया दिल का दर्द इसके बाद पीयूष मिश्रा ने हारमोनियम को दर्द का रूख दिया और अपना लिखा गाना थोड़ा नजारा, चटपट बातें सुनाना शुरू किया श्रोताओं ने पहले तालियां बजाई पर उसके बाद हर शब्द पर लगा जैसे पीयूष मिश्रा उनके जीवन की बात कर रहे हैं। पूरे कंसर्ट स्थल पर सन्नाटा छ गया सिर्फ पीयूष मिश्रा और उनके बैंड की आवाज सुनाई दे रही थी। लोग उस गाने में स्वयं को ढूंढते नजर आये। दर्शकों को लगातर झूमने पर किया मजबूर इसके बाद पीयूष मिश्रा ने अगली प्रस्तुति दी और इसमें व्हिस्की पर गीत गया। जिसके बोल थे रोटी नहीं है घर में, सब्जी नहीं है घर में, व्हिस्की तो बेहिसाब है। जिसे सुनकर श्रोताओं ने जमकर तालियां बजाई इसके अलावा उन्होंने हेमलेट और शेक्सपियर को भी अपने गाने से मंच पर उअतरा जिसे सुनकर श्रोता देर रात तक झूमते रहे वो पुराने दिन गाया तो श्रोताओं ने दिया साथ रात 9 बजे शुरू हुआ पीयूष मिश्रा का कंसर्ट रात 11 बजे उनकी शानदार प्रस्तुति आरंभ है प्रचंड से खत्म हुई। श्रोताओं की फरमाइश पर पीयूष मिश्रा ने वो पुराने दिन, वो सुहाने दिन, आशिकाने दिन, ओस की जमीं पर वो पुराने दिन सुनाया तो श्रोताओं ने उनके साथ इसे गुनगुनाया। इसके बाद उन्होंने अपना सबसे फेवरेट आरंभ है प्रचंड गाया तो पूरा हाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा इस प्रस्तुति के बाद उन्होंने मंच से विदा ली और दोबारा काशी आने का वादा किया। अब जानिए क्या हुआ बाहर, युवाओं ने क्या लगाया आरोप और पुलिस और होटल कर्मियों ने क्या किया?… सैकड़ों युवाओं को रोका गया बाहर पीयूष मिश्रा के कंसर्ट के पहले युवाओं में क्रेज देखने को मिला। एक हजार से अधिक युवा कंसर्ट स्थल के अंदर थे तो उतने ही होटल के बाहर अंदर जाने के लिए जद्दोजहद कर रहे थे। उन्हें इंट्री नहीं दी जा रही थी। स्थिति कंट्रोल नहीं होने पर पुलिस बुलाई गयी। इस दौरान धक्का-मुक्की में कई युवाओं को चोट लगी। उन्हें धकेल के बाहर रोका गया। पुलिस एसआई ने मारा थप्पड़, लड़कियों से अभद्रता इस दौरान कचहरी चौकी पर तैनात एक एसआई ने महिलाओं को धकलते हुए थप्पड़ मारा और एक युवती का हाथ भी खींचा। इसके बाद पब्लिक के आउट ऑफ़ कंट्रोल की सूचना पर पहुंचे एसीपी नितिन तनेजा ने रस्सी लगवाकर भीड़ को नियंत्रित करवाया। इस दौरान आयोजक दीपक मधोक और अन्य पर वहां पहुंचे लोगों ने आरोप लगाया कि अगर नहीं इंट्री देनी थी तो बुलाया ही क्यों? रात 10 बजे तक बाहर डटे पीयूष मिश्रा को सुनने के लिए दूर-दराज से पहुंचे लोग रात 10 बजे तक गेट के बाहर जमे रहे। पर उन्हें इंट्री नहीं दी गयी। उनका आक्रोश साफ झलक रहा था। इसमें दीपक मधोक के स्कूल में पढ़ने वाले पैरेंट्स भी थे जिन्हे स्कूल में यहां आने के लिए कहा गया था। इंट्री के लिए बच्चे के आईकार्ड को सफिशिएंट बताया गया था।


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