पारा क्षेत्र में अवैध रूप से संचालित दूध डेयरियों को शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित करने में नगर निगम और पुलिस प्रशासन विफल है। शासनादेश जारी हुए कई महीने बीत जाने के बाद भी न तो इन डेयरियों की सूची तैयार की जा सकी है और न ही इनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई की गई है। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। शहर के घनी आबादी वाले इलाकों में संचालित इन अवैध डेयरियों के कारण स्थानीय निवासियों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। खुले मैदानों और खाली प्लॉटों में गोबर के ढेर लगे हुए हैं, जिससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है और संक्रामक बीमारियों का खतरा बना हुआ है। डेयरी संचालक अपने पशुओं को सड़कों पर खुला छोड़ देते हैं, जिससे आए दिन राहगीर दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त, तबेलों के आसपास और खाली मैदानों में फेंका गया गोबर नगर निगम के सफाई कर्मचारी नहीं उठा रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप गंदगी और दुर्गंध फैल रही है। इन इलाकों में हैं कई डेयरियां प्रदेश शासन के मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश जारी किए थे कि शहरी क्षेत्रों में संचालित सभी दूध डेयरियों को शहर की सीमा से बाहर स्थानांतरित किया जाए। इस कार्य की जिम्मेदारी नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन को सौंपी गई थी। शासन ने इसके लिए तीन माह की समय-सीमा निर्धारित की थी और लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी। हालांकि, आदेश जारी होने के कई माह बाद भी जमीनी स्तर पर कोई ठोस पहल दिखाई नहीं दे रही है। डिप्टी खेड़ा, नई बस्ती, बादल खेड़ा, पाल कॉलोनी, पिंक सिटी, कुंदन बिहार, गंगा बिहार, ज्ञानेन्द्र विहार, पिंक सिटी फेस-2, घुसयान, तिकोना, बजरंग विहार और हैदर कैनाल कॉलोनी सहित कई मोहल्लों में खुलेआम दूध डेयरियों का संचालन जारी है। इन इलाकों के खाली प्लॉट गोबर से भरे पड़े हैं, जिससे स्थानीय निवासियों का जीवन प्रभावित हो रहा है। अधिकारियों की इस लापरवाही के कारण क्षेत्रवासियों में रोष बढ़ रहा है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
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