मेरठ कपसाड़ कांड के आरोपी पारस सोम की उम्र से जुड़ी याचिका पर बहस पूरी हो गई है। शनिवार को कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुना और उसके बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। सोमवार को कोर्ट अपना फैसला सुनाएगी। प्रतिवादी पक्ष का दावा है कि केस जेजे बोर्ड में ही ट्रांसफर होगा। पहले एक नजर पूरे मामले पर
मेरठ के सरधना थाना क्षेत्र अंतर्गत स्थित ग्राम कपसाड़ में 8 जनवरी को इसी गांव का पारस सोम खेत पर मां सुनीता के साथ काम कर रही रूबी को अगवा करने पहुंचा। सुनीता ने विरोध कर दिया। आरोप है कि पारस ने उसी की बलकटी छीनकर उस पर वार किया और रूबी को अगवा कर फरार हो गया। बाद में सुनीता की अस्पताल में मौत हो गई थी। पारस जेल में है। उसके अधिवक्ताओं संजीव राणा, बलराम सोम और विजय शर्मा ने वारदात के वक्त पारस को नाबालिग बताते हुए कोर्ट से उसका केस जेजे बोर्ड में ट्रांसफर करने की मांग उठाते हुए याचिका दायर कर दी। सर्टिफिकेट में आरोपी पारस नाबालिग
कपसाड़ कांड कई दिन तक चर्चाओं में रहा। इसी बीच तीन अधिवक्ताओं का एक पैनल सामने आया और उसने पारस की जन्मतिथि 11-5-2008 बताते हुए मामले की सुनवाई जेजे बोर्ड के अंतर्गत करने की याचिका दायर कर दी। 14 जनवरी को यह याचिका दायर की गई, जिसे कोर्ट ने स्वीकार भी कर लिया। एडवोकेट संजीव राणा का दावा है कि इस जन्मतिथि के अनुसार वारदात के वक्त पारस की उम्र उम्र 17 साल, 7 महीने, 25 दिन है। बहस के बाद कोर्ट ने रखा फैसला सुरक्षित
शनिवार को वादी पक्ष को कोर्ट के समक्ष कक्षा चार का सर्टिफिकेट देना था लेकिन वह उपलब्ध नहीं करा सके। इसके बाद वादी पक्ष के अधिवक्ता संजीव राणा ने अपोज किया और कहा किस नियम के तहत यह मांग की जा रही है। ऐसा कोई प्रावधान ही नहीं है। हाईस्कूल सर्टिफिकेट ही काफी होता है। उन्होंने बताया कि वह रूलिंग भी पेश कर चुके हैं। बलराम बोले- ट्रायल की आवश्यकता नहीं
पारस के दूसरे अधिवक्ता बलराम सोम ने न्यायालय को बताया गया कि अश्वनी कुमार सक्सेना बनाम स्टेट ऑफ मध्य प्रदेश की साइटेशन के पहरा नंबर 32 में साफ साफ लिखा है कि अगर हमारे पास सही डाक्यूमेंट है तो मान्य न्यायालय को इसमें तुरंत डिसीजन लेना चाहिए ना कि ट्रायल की तरह लंबा खींचना चाहिए। सोमवार को सुनाएगी कोर्ट फैसला
करीब एक घंटे तक बहस चली। दोनों पक्षों ने अपनी अपनी दलीलें पेश कीं। इसके बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों के दस्तावेज लिए और फैसला सुरक्षित कर लिया। अधिवक्ता संजीव राणा ने बताया कि याचिका पर अपना निर्णय सोमवार को सुनाएगी। उन्हें पूर्ण भरोसा है कि निर्णय उनके पक्ष में ही आएगा। अब क्रम से जानते हैं कोर्ट की प्रोसिडिंग
– 10 जनवरी को पारस सोम को कोर्ट ने 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जिला कारागार भेज दिया।
– 14 जनवरी को तीन अधिवक्ताओं के पैनल ने हाई स्कूल सर्टिफिकेट से जुड़ी रूलिंग के साथ पारस की तरफ से याचिका डाली।
– 22 जनवरी को याचिका मंजूर हुई और कोर्ट ने वादी पक्ष के सभी लोगों को नोटिस जारी कर दिए।
– 31 जनवरी को वादी पक्ष ने बेसिक शिक्षा से जुड़े सर्टिफिकेट की रूलिंग लाने का दावा किया।
– 3 फरवरी को वादी पक्ष रूलिंग उपलब्ध नहीं कर पाया और तारीख मांगी।
– 4 फरवरी की तिथि कोर्ट की तरफ से निर्धारित कर दी गई।
– 4 फरवरी को वादी पक्ष ने कक्षा 5 का सर्टिफिकेट जारी किया लेकिन उसमें भी पारस की जन्मतिथि हाईस्कूल के अनुसार 11-5-2008 ही निकली।
– अब कक्षा 1 से कक्षा चार तक के सर्टिफिकेट 7 फरवरी को तलब किए गए थे।
– 7 फरवरी को याचिका पर दोनों पक्षों की बहस हुई पूरी।
– 7 फरवरी को कोर्ट ने सोमवार तक के लिए फैंसला किया सुरक्षित।
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