गोंडा में भगवान श्रीकृष्ण की पावन बांसुरी और चरण पादुका पहली बार मथुरा स्थित उनके मंदिर से बाहर निकलकर गोंडा पहुंची हैं। इस ऐतिहासिक और दुर्लभ क्षण का साक्षी बनने के लिए बुधवार देर रात नंदिनी निकेतन में आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। सद्गुरु रितेश्वर महाराज जब देर रात बांसुरी और चरण पादुका लेकर नंदिनी निकेतन पहुंचे, तो कैसरगंज के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह और उनके हजारों समर्थकों ने उनका भव्य स्वागत किया। सद्गुरु रितेश्वर महाराज के आगमन की सूचना मिलते ही नंदिनी निकेतन मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुट गई। गोंडा ही नहीं, बल्कि बलरामपुर, बहराइच, अयोध्या और आसपास के कई जिलों से लोग देर रात तक दर्शन के लिए पहुंचे। जैसे ही भगवान श्रीकृष्ण की चरण पादुका और बांसुरी के दर्शन हुए, पूरा परिसर “जय श्रीकृष्ण” के जयकारों से गूंज उठा। श्रद्धालु इस क्षण को अलौकिक और अविस्मरणीय बताते नजर आए। नंदिनी माता की पूजा के बाद पहुंचे कार्यक्रम स्थल नंदिनी माता की विधिवत पूजा-अर्चना के बाद सद्गुरु रितेश्वर महाराज राष्ट्रकथा के कार्यक्रम स्थल पहुंचे। यहां उन्होंने पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के साथ देर रात तक तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान अयोध्या सहित विभिन्न जिलों से आए संत-महात्माओं को सद्गुरु ने आशीर्वाद प्रदान किया। 8 जनवरी तक चलेगी राष्ट्रकथा नंदिनी निकेतन में 8 जनवरी तक राष्ट्रकथा का आयोजन किया जा रहा है। सद्गुरु रितेश्वर महाराज ने बताया कि यह भारत में आयोजित होने वाली पहली राष्ट्रकथा है, जिसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करना और इसमें युवाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र तभी मजबूत होगा, जब युवा पीढ़ी अपने दायित्वों को समझे और देश के लिए सकारात्मक भूमिका निभाए। कनाडा तक पहुंचेगी राष्ट्रकथा सद्गुरु रितेश्वर महाराज ने जानकारी दी कि इस राष्ट्रकथा को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने की भी तैयारी की गई है। कनाडा में एक बड़ी डिजिटल स्क्रीन लगाई जा रही है, ताकि वहां रह रहे भारतीय बच्चे भी ऑनलाइन माध्यम से इस राष्ट्रकथा को सुन सकें और राष्ट्र निर्माण की भावना से जुड़ सकें। आठ दिनों तक गोंडा में विराजमान रहेंगे अवध बिहारी सद्गुरु रितेश्वर महाराज ने बताया कि यह पहली बार है जब बांके बिहारी की चरण पादुका और बांसुरी आठ दिनों तक गोंडा में ‘अवध बिहारी मिलन’ के साथ कार्यक्रम स्थल पर विराजमान रहेंगी। इस दौरान भगवान श्रीकृष्ण के साथ सभी देवी-देवताओं का भी प्रतीकात्मक रूप से यहीं वास रहेगा। आस्था, भक्ति और राष्ट्रचेतना के संगम के रूप में यह आयोजन गोंडा के धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास में एक नए अध्याय के रूप में दर्ज होता नजर आ रहा है।
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