गोंडा के पसका मेले में आज पौष पूर्णिमा के अवसर पर 2 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने अब तक आस्था की डुबकी लगाई। पुराणों में इसे ‘लघु प्रयाग’ के नाम से जाना जाता है। सुबह 4 बजे से ही पसका घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़नी शुरू हो गई थी, जो अभी भी जारी है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। मेले में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। पूरे क्षेत्र की निगरानी सीसीटीवी और ड्रोन कैमरों से की जा रही है। यह स्थान भगवान वाराह की अवतार स्थली के रूप में भी जाना जाता है, जिसे शुकर क्षेत्र कहते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विष्णु ने यहीं पर हिरण्याक्ष का वध करने के लिए वाराह का अवतार लिया था। हिरण्याक्ष ने पूरी पृथ्वी पर अपना आधिपत्य जमा लिया था और देवताओं, साधु-संतों पर अत्याचार बढ़ा दिए थे। भगवान वाराह ने मैलाकोट गांव में हिरण्याक्ष का वध किया था, जो यहां से लगभग दो किलोमीटर दूर है। वध के बाद उन्होंने इसी नदी में स्नान किया था। । देखें 5 तस्वीरें… गोस्वामी तुलसीदास ने भी अपनी रामायण में इस स्थान का उल्लेख ‘तिरमोहनी’ के रूप में किया है। यहां कल्पवासी एक महीने पहले से ही कल्पवास करते हैं। ऐसी मान्यता है कि आज के दिन यहां स्नान करने से मनुष्य को सूअर की योनि में जन्म लेने से मुक्ति मिलती है। पसका, गोंडा मुख्यालय से 36 किलोमीटर दूर सरयू नदी के किनारे स्थित है, जहां सरयू और घाघरा नदी का संगम होता है।
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