इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्नी की हत्या के आरोपी की उम्रकैद की सजा रद करते हुए बरी कर दिया है और कहा है कि अभियोजन पक्ष परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की कड़ी स्थापित करने में विफल रहा, जो आरोप साबित कर सकती हो।अन्य ठोस साक्ष्य भी नहीं पेश कर सका। घटनास्थल पर आरोपी की मौजूदगी भी साबित नहीं हो सकी और गवाहों के बयानों में गंभीर विरोधाभास भी है। यह फैसला न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता और न्यायमूर्ति समित गोपाल की खंडपीठ ने गाजियाबाद के ट्रोनिका थाने में दर्ज मामले में हत्या का दोषी करार राजकुमार की जेल अपील स्वीकार करते हुए दिया है। ट्रायल कोर्ट ने वर्ष 2019 में राजकुमार को पत्नी पूजा की हत्या का दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने कहा कि मृतका की मां ने आरोपी की गिरफ्तारी घटनास्थल से बताई, जबकि पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसे ट्रोनिका सिटी के गेट नंबर दो से पकड़ा गया। हत्या में प्रयुक्त गैस सिलेंडर की बरामदगी भी संदिग्ध पाई गई। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अभियोजन पक्ष संदेह से परे अपराध सिद्ध नहीं कर सका। इसके साथ ही आरोपी को बरी करते हुए तत्काल रिहा करने का आदेश दिया गया है।
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