पद्मश्री राजाराम जैन (96) का रविवार को निधन हो गया। वह सेक्टर-34 में रहने थे। वह कुछ समय से बीमार चल रहे थे। उनकी देखभाल के लिए पूरा परिवार पहले से ही आया था। उनके चार बच्चे रत्ना जैन, राजीव गौयल, रश्मि जैन और राजेश पंकज हैं। सभी बाहर रहते हैं। अंतिम संस्कार सोमवार को सेक्टर-94 में किया जाएगा। पांडुलिपियों का किया अनुवाद
राजाराम जैन प्रसिद्ध लेखक व प्राकृत, अपभ्रंश जैसी भाषाओं के विद्वान थे। उनके निधन की खबर से साहित्य जगत में शोक की लहर है। 1929 में मध्य प्रदेश के मालथौन में जन्मे राजाराम जैन की भाषा पकड़ और दुर्लभ पांडुलिपियों का अध्ययन कर उनका अनुवाद करने की कला हासिल थी। भारत की प्राचीनतम भाषाओं के ज्ञान के लिए 2024 में पद्मश्री पुरस्कार मिला था। 2000 में प्रेसिडेंशियल अवॉर्ड (राष्ट्रपति द्वारा दिया जाने वाला सम्मान प्रमाण) दिया गया। 40 से अधिक पुस्तकें लिखीं
राजाराम जैन ने 40 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं। उन्होंने 14वीं और 15वीं शताब्दी की अप्रकाशित पांडुलिपियों को सालों इकट्ठा करने के बाद उन्हें क्रमिक रूप से तैयार कर उनका अध्ययन किया। यह तब के कवि, कवि रैधु की रचनाएं थीं। उनका अध्ययन करने के साथ-साथ राजाराम जैन ने हिंदी अनुवाद भी किया, जिससे पूरे साहित्य जगत में 14वीं शताब्दी की पांडुलिपियों को पढ़ने और संस्कृति, साहित्य को समझने का मौका मिल सका।
https://ift.tt/SeFcApu
🔗 Source:
Visit Original Article
📰 Curated by:
DNI News Live

Leave a Reply