नोएडा के सेक्टर-93ए में बनाए गए सुपरटेक ट्विन टावर को गिरे हुए चार साल से ज्यादा हो गए। इस मामले में गठित लखनऊ विजिलेंस की जांच अब अपने फाइनल पड़ाव पर है। मंगलवार को विजिलेंस की टीम प्राधिकरण कार्यलय पहुंची। टीम ने टि्वन टावर से जुड़े कंपलीशन सर्टिफिकेट, कमेटी की रिपोर्ट, डेमोलिशन रिपोर्ट और इससे जुड़े दस्तावेज लिए। टीम करीब दो से ढाई घंटे तक प्राधिकरण में रही। बिल्डर और नोएडा प्राधिकरण के तत्कालीन अधिकारियों की सांठगांठ से सेक्टर-93ए स्थित सुपरटेक एमरॉल्ड कोर्ट सोसाइटी परिसर में ट्विन टावर खड़े हुए थे। एओए की तरफ से साल 2012 में हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया। 2014 के मार्च में हाइकोर्ट ने इनको ध्वस्त करने का आदेश दिया। इसके खिलाफ बिल्डर सुप्रीम कोर्ट गया। 31 अगस्त 2021 को इनको ध्वस्त करने के आदेश दिया। इसके बाद 28 अगस्त 2022 को ट्विन टावर ध्वस्त कर दिए गए। एसआईटी की रिपोर्ट के बाद दर्ज हुई थी एफआईआर एसआईटी की जांच रिपोर्ट के बाद नोएडा प्राधिकरण के नियोजन विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक वैभव गुप्ता की तरफ से अक्टूबर 2021 को लखनऊ विजिलेंस में तत्कालीन सीईओ, एसीईओ सहित 24 अधिकारी, सुपरटेक के चार निदेशक और दो आर्किटेक्ट कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। एफआईआर दर्ज हुए करीब चार साल से ज्यादा समय हो गया है। माना जा रहा है कि जल्द ही एक्शन हो सकता है।
निचले पायदान पर हो चुका एक्शन इस मामले में प्राधिकरण के नियोजन विभाग में कार्यरत रहे सहयुक्त नगर नियोजक ऋतुराज व्यास, नियोजन सहायक मुकेश गोयल, सहायक प्रबंधक नियोजक अनीता और सहयुक्त नगर नियोजक विमला सिंह को निलंबित कर दिया गया था लेकिन एसीईओ-सीईओ स्तर के एक भी बड़े अफसर पर शासन स्तर से कार्रवाई नहीं हुई है। इनमें से प्राधिकरण की सेवा में कार्यरत रहे 11 अधिकारियों की जांच ग्रेटर नोएडा के एसीईओ सौम्य श्रीवास्तव ने की।
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