मथुरा में भाजपा नेता की शिकायत पर निलंबित किए गए प्राथमिक विद्यालय नौहझील के प्रधान अध्यापक को जांच के बाद बहाल कर दिया गया है। बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा 2 सदस्यीय जांच समिति द्वारा कराई गई जांच में आरोप झूठे पाए गए। भाजपा नेता ने बेसिक शिक्षा अधिकारी से शिकायत की थी कि प्रधान अध्यापक स्कूल में नमाज कराते हैं और राष्ट्रगान नहीं करते। दो सदस्यीय टीम ने की जांच बेसिक शिक्षा अधिकारी रतन कीर्ति ने प्राथमिक विद्यालय नौहझील के प्रधान अध्यापक जान मोहम्मद के खिलाफ की गई शिकायत के मामले में दो सदस्यीय जांच टीम बनाई थी। जिसमें खंड शिक्षा अधिकारी मांट और छाता को रखा गया। इस मामले में पहले BSA ने जांच समिति को एक महीने में रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे। लेकिन जब मामले ने तूल पकड़ा तो 3 दिन में जांच रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा। जांच में शिकायत मिली झूठी और असत्य शुक्रवार को खंड शिक्षा अधिकारी मांट और छाता द्वारा BSA को रिपोर्ट सौंप दी गई। जिसमें कहा गया कि प्रधान अध्यापक जान मोहम्मद पर लगाए गए आरोप पूरी तरह से झूठे और असत्य हैं। समिति ने इस दौरान स्कूल में जाकर भी जांच की थी। जांच टीम द्वारा रिपोर्ट सौंपने के बाद BSA रतन कीर्ति ने शुक्रवार को प्रधान अध्यापक जान मोहम्मद को निकबित किए जाने की तारीख से सवेतन बहाल कर दिया। सियासी रंजिश या गलतफहमी पूरा मामला 30 जनवरी का है। जब भाजपा के बाजना मंडल अध्यक्ष दुर्गेश प्रधान ने प्राथमिक विद्यालय नौहझील के प्रधान अध्यापक जान मोहम्मद पर गंभीर आरोप लगाए। बेसिक शिक्षा अधिकारी को सौंपे शिकायती पत्र में भाजपा नेता दुर्गेश प्रधान ने आरोप लगाया कि जान मोहम्मद स्कूल में बच्चों को नमाज पढ़ाते हैं,उनको इस्लाम धर्म अपनाने के लिए प्रेरित करते हैं। इसके अलावा वह स्कूल में राष्ट्रगान भी नहीं करते। भाजपा नेता की शिकायत को आधार बनाकर बेसिक शिक्षा अधिकारी ने बिना जांच किए एक दिन बाद ही 31 जनवादी को जान मोहम्मद को पदीय दायित्वों में लापरवाही का दोषी मानते हुए निलंबित कर दिया था। उस वक्त इस कार्रवाई से शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया था। ग्राउंड जीरो पर फेल साबित हुए थे आरोप प्रधान अध्यापक जान मोहम्मद पर लगाए गए गंभीर आरोपों की पड़ताल करने के लिए जब दैनिक भास्कर की टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंची तो वहां हकीकत कुछ और ही निकली। स्कूल में 8 शिक्षक में से 7 हिंदू थे, वहीं 235 बच्चों में से महज 89 बच्चे मुस्लिम समाज के निकले। स्कूल में छात्र,अध्यापक और ग्रामीणों ने लगाए गए आरोपों को बेबुनियाद बताया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित दो-सदस्यीय जांच समिति ने 4 फरवरी को स्कूल में डेरा डाला। समिति ने न केवल कागजों की जांच की, बल्कि छात्रों और गांव वालों से भी सीधी बात की। चौंकाने वाली बात यह रही कि भौतिक सत्यापन में हेडमास्टर के खिलाफ एक भी पुख्ता सबूत या गवाह नहीं मिला। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया कि शिकायत ‘द्वेषपूर्ण’ और ‘असत्य’ थी। सवेतन बहाली का फरमान BSA रतन कीर्ति ने 6 फरवरी को आधिकारिक आदेश जारी करते हुए जान मोहम्मद को बहाल कर दिया। खास बात यह है कि उन्हें ‘सवेतन’ बहाली मिली है, यानी सस्पेंशन के दौरान का पूरा पैसा उन्हें मिलेगा। अब विभागीय नियमों के तहत ऑनलाइन पोर्टल के जरिए उन्हें स्कूल आवंटित किया जाएगा। इस मामले में बेसिक शिक्षा अधिकारी पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। इतने गंभीर आरोपों की शिकायत मिलने पर BSA रतन कीर्ति ने क्या जांच कराना मुनासिब नहीं समझा। एक दिन में ही BSA ने प्रधान अध्यापक को निलंबित कर दिया था। इस मामले में जब ग्रामीण बेसिक शिक्षा अधिकारी से मिले तो उस समय भी उनका रवैया अजीब रहा। वायरल वीडियो में BSA ग्रामीणों पर अपना गुस्सा निकालती हुई दिखाई दे रही थी। साफ है अपनी गलती को छुपाने के चक्कर में वह अपने गुस्सा ग्रामीणों पर निकाल रही थी ।
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