प्रतापगढ़ में विशेष न्यायाधीश एससीएसटी एक्ट हेमंत कुमार की कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी अविनाश मिश्र उर्फ रिशू को आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। यह मामला लालगंज थाना क्षेत्र के एक गांव से संबंधित है। पीड़िता की मां द्वारा दर्ज कराए गए मुकदमे के अनुसार, यह घटना 5 अप्रैल 2020 को हुई थी। गांव के अविनाश मिश्र उर्फ रिशू ने उनकी नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए। उसने शादी का झांसा देकर लगभग छह महीने तक पीड़िता का दुष्कर्म किया। जब पीड़िता ने अविनाश से शादी करने के लिए कहा, तो उसने पीड़िता से अपने एक दोस्त के साथ शारीरिक संबंध बनाने को कहा। पीड़िता के मना करने पर, अविनाश ने उसे मोबाइल में उसकी अश्लील वीडियो क्लिप दिखाई। उसने धमकी दी कि अगर वह उसकी बात नहीं मानेगी तो वह वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल कर देगा। आरोपी ने पीड़िता और उसके परिजनों को भी धमकाया था। कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अविनाश मिश्र उर्फ रिशू को सश्रम आजीवन कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। अर्थदंड अदा न करने पर उसे छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। वहीं, कोर्ट ने संदेह का लाभ देते हुए सह-आरोपी सच्चिदानंद पांडेय उर्फ अंकित को दोषमुक्त कर दिया। इस मामले में राज्य की ओर से एडीजीसी सुरेश बहादुर सिंह ने पैरवी की।
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