प्रतापगढ़ में नाबालिग के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) पारुल वर्मा ने आरोपी समीर अहमद को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने उसे 20 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। न्यायालय ने आदेश दिया है कि अर्थदंड की यह राशि पीड़िता को उसके चिकित्सीय और मानसिक आघात की क्षतिपूर्ति तथा पुनर्वास के लिए प्रदान की जाएगी। राज्य की ओर से इस मामले की पैरवी विशेष लोक अभियोजक निर्भय सिंह ने की। मुकदमे के वादी के अनुसार, यह घटना 14 जुलाई 2024 की रात लगभग 2:00 से 3:00 बजे के बीच हुई थी। आरोपी समीर अहमद ने वादी की 17 वर्षीय भतीजी को शादी का झांसा देकर बहला-फुसलाकर भगा लिया था। पीड़िता के पास उस समय एक मोबाइल फोन था, जो बाद में बंद हो गया। पीड़िता ने न्यायालय में दिए अपने बयान में बताया कि आरोपी उससे मीठी-मीठी बातें कर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाता था। आरोपी के फोन करने पर वह अपने घर के पीछे स्थित सड़क पर गई, जहाँ आरोपी उससे मिला और बाइक से उसे अपनी बुआ के घर ले गया। बुआ के घर कोई मौजूद नहीं था, जहाँ आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता ने यह भी बताया कि आरोपी उस पर धर्म परिवर्तन कर इस्लाम कबूल करने और निकाह करने का दबाव डालता था, साथ ही उसे अच्छे जीवन का लालच भी देता था। अभियोजन पक्ष द्वारा सात गवाहों के माध्यम से कुल 12 प्रदर्श न्यायालय में सिद्ध किए गए। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि यदि पीड़िता को पूर्व में रानी लक्ष्मीबाई महिला सम्मान कोष से क्षतिपूर्ति प्राप्त नहीं हुई है, तो नियमानुसार उसे क्षतिपूर्ति प्रदान की जाए।
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