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दो बार ट्रैप फेल…तीसरी बार में पकड़े घूसखोर अफसर:झांसी में CBI घरों की तलाशी ली, सुपरिडेंटेंड के घर मिली लेनदेन वाली डायरी

झांसी में 70 लाख की रिश्वत लेने वाली सेंट्रल जीएसटी की डिप्टी कमिश्नर (IRS अफसर) प्रभा भंडारी समेत 3 अफसरों को पकड़ने के लिए CBI को काफी मेहनत करनी पड़ी। पहले दो बार ट्रैप की कार्रवाई फेल हो गई थी। फिर तीसरी बार सीबीआई ने ठोस रणनीति बनाई और तीनों अफसरों समेत 5 आरोपी पकड़े गए। सभी के घरों में तलाशी ली गई। इस दौरान आरोपी सुपरिडेंटेंड अनिल तिवारी के घर से कई गोपनीय दस्तावेज समेत लेनदेन वाली 3 डायरियां बरामद हुई। इनमें ही सेंट्रल जीएसटी ऑफिस में चलने वाले पूरे खेल का राज छिपा है। सीबीआई ने मंगलवार को 70 लाख की घूस लेते सुपरिटेंडेंट अनिल तिवारी और अजय शर्मा को रंगे हाथ गिरफ्तार किया था। उनके साथ दुर्गा हार्डवेयर फर्म के मालिक राजू मंगनानी और वकील नरेश को भी अरेस्ट किया था। बाद में दिल्ली से डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी को अरेस्ट कर लिया था। सर्राफा बंधुओं पर कार्रवाई के बाद राडार पर आए 21 नवंबर को सेंट्रल जीएसटी ने सर्राफा बाजार स्थित जाने माने सराफा कारोबारी के यहां छापा मारा था। यहां टैक्स का घालमेल मिला था। टर्नओवर के सापेक्ष कागजों में काफी कम टैक्स जमा हुआ पाया गया। कार्रवाई के दौरान खुद डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी एवं सुपरिडेंटेंड अनिल तिवारी मौजूद थे। टीम कई दस्तावेज भी अपने साथ ले गई थी। इस मामले में सराफा कारोबारी पर मोटा जुर्माना लगाने की कवायद शुरू हो गई थी। उसके कुछ दिन बाद 5 दिसंबर को उनके चचेरे भाई के ज्वैलर्स शोरूम में जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) टीम ने छापा मारा। यहां सोना तस्करी का मामला सामने आया था। सूत्रों का कहना था कि इसके बाद सराफा बंधुओं ने मामला निपटाने के लिए अनिल तिवारी से संपर्क साधा। अनिल ने मदद करने का भरोसा दिलाते हुए उनको लखनऊ बुलाया। उनसे मोटी रकम की मांग की गई थी। इस सौदे की भनक भी सीबीआई को लग गई थी। अनिल तिवारी लखनऊ में थे लेकिन पैसों का इंतजाम न हो पाने से सराफा कारोबारी नहीं पहुंचे। इस वजह से सीबीआई वहां पकड़ने में असफल हो गई। इसके बाद झांसी में भी इन दोनों को पकड़ने की कोशिश हुई थी। तीसरी बार जाकर अनिल एवं अजय शर्मा ट्रैप में आए। एक पद पर दो अधिकारी थे सुपरिडेंटेंड अनिल सेंट्रल जीएसटी की डिवीजन प्रिवेंटिव टीम में तैनात था। झांसी में इसका सिर्फ एक पद है लेकिन अनिल ने अपने संपर्कों के सहारे अजय शर्मा को भी यहीं तैनात करा रखा था। अनिल तिवारी के रसूख का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि उसने नौकरी के करीब 15-20 साल झांसी में ही बिता दिए। महज डेढ़ साल के लिए उसका तबादला आगरा हुआ था। उसके बाद अपने संपर्कों की बदौलत झांसी लौट आया। यहां अजय शर्मा के साथ मिलकर कारोबारियों के यहां छापा पड़ने के बाद उनसे तोलमोल करते थे। झांसी, उरई, ललितपुर, हमीरपुर के सभी बड़े कारोबारियों से अनिल की सीधी डीलिंग थी। हर महीने लगभग 3-4 करोड़ की उगाही थी। इसका पूरा हिसाब-किताब अनिल अपनी डायरियों में रखता था। ये डायरियां सीबीआई अपने साथ लेकर गई है। अनिल ने पत्नी एवं भाई के नाम से करोड़ों रुपए का निवेश झांसी, लखनऊ एवं दिल्ली की कई संपत्तियों में कर रखा है। अनिल के अलावा सीबीआई ने डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी के घर से भी डायरी एवं लैपटॉप बरामद किए हैं। सीबीआई इनकी भी जांच कर रही है। इनके सहारे भी कई राज खुलकर सामने आएंगे। 160 अफसरों की प्रमोशन लिस्ट 2016 बैच की आईआरएस अफसर प्रभा भंडारी का प्रमोशन एक जनवरी 2026 को ज्वाइंट कमिश्नर पद पर होना था। मगर सीबीआई की गिरफ्त में आने के बाद उनके साथ के 160 अफसरों की प्रमोशन सूची सीबीआईसी बोर्ड ने रोक दी। प्रभा भंडारी के साथी अफसरों ने बताया कि प्रमोशन सूची में प्रभा का नाम था। इस वजह से सूची जारी नहीं हुई। जबकि इस प्रमोशन के बाद उनकी मनचाही जगह पर तैनाती होनी थी। इसके पहले पति की बबीना में तैनाती के चलते प्रभा की झांसी में तैनाती हुई थी। इस प्रमोशन के बाद जम्मू में उनके जाने की तैयारी थी। प्रमोशन सूची का इंतजार चल रहा था। यह प्रमोशन सूची गुरुवार को जारी होनी थी लेकिन इसके पहले प्रभा घूसखोरी मामले में फंस गई। अब प्रमोशन सूची पर भी रोक लगा दी गई है। सीबीआई की रडार पर कैसे आईं? अब पढ़िए, सीबीआई के ट्रैप की पूरी कहानी CBI की FIR में दो और कारोबारियों के नाम खुलासा होने के बाद सीबीआई ने लखनऊ में 7 नामजद और अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया है। इसमें डिप्टी कमिश्नर प्रभा भंडारी, जीएसटी सुपरिटेंडेंट सिविल लाइन निवासी अनिल तिवारी और शिवाजी नगर निवासी अजय शर्मा, सिविल लाइंस निवासी वकील नरेश कुमार गुप्ता और मयूर विहार कॉलानी निवासी जय दुर्गा हार्डवेयर के मालिक राजू मंगनानी अरेस्ट हो चुके हैं। इसके अलावा राजू का भाई तेजपाल मंगनानी और आवास विकास कॉलोनी-1 निवासी जय अंबे प्लाईवुड के मालिक लोकेश तोलानी को भी आरोपी बनाया गया है। पूरे प्रकरण की जांच सीबीआई इंस्पेक्टर आशीष कुमार सिंह कर रहे हैं। सीबीआई ने डिप्टी कमिश्नर समेत दोनों सुपरिटेंडेंट की अकूत संपत्तियां खंगालना शुरू कर दिया है।


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