देवरिया स्थित सिद्धपीठ मनोकामनापूर्ण हनुमान मंदिर परिसर में एक भव्य हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन का शुभारंभ वैदिक रीति-रिवाजों के साथ दीप प्रज्वलन, शंखध्वनि और स्वस्ति वाचन से हुआ। इस अवसर पर पंडित अजीत एवं पंडित मनीष ने विधिवत मंत्रोच्चार के साथ पूजन संपन्न कराया। कार्यक्रम में पुष्पराज तिवारी ने मंचासीन अतिथियों का परिचय कराया। आयोजन समिति के सदस्य हृदयलाल, महेश्वर, वीरेंद्रपति और गरिमा बरनवाल ने अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। सम्मेलन में मातृशक्ति का प्रतिनिधित्व कर रहीं महिमा श्रीवास्तव ने राष्ट्र निर्माण में नारी शक्ति की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समाज की प्रगति तभी संभव है जब पुरुष और महिलाएं समान कर्तव्यभाव से मिलकर कार्य करें। राष्ट्र निर्माण में महिलाओं का योगदान सदैव महत्वपूर्ण और प्रेरणादायी रहा है। उत्तराधिकारी महंत राजेश नारायण दास ने अपने संबोधन में कहा कि हिंदुत्व की रक्षा और राष्ट्र की एकता के लिए समाज को जाति-पाति से ऊपर उठकर संगठित होना होगा। उन्होंने सभी से एकजुट होकर समाज और राष्ट्रहित में कार्य करने का आह्वान किया। सम्मेलन के मुख्य वक्ता विभाग प्रचारक दीपक जी ने कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, स्व का जागरण और नागरिक कर्तव्यों पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि इतिहास साक्षी है कि जब-जब हिन्दू समाज कमजोर हुआ, तब-तब देश को विभाजन और संकटों का सामना करना पड़ा। उन्होंने गुरु गोविंद सिंह, गुरु तेग बहादुर और छत्रपति शिवाजी महाराज के त्याग और बलिदान का उल्लेख करते हुए उनके आदर्शों को आत्मसात करने का संदेश दिया। कार्यक्रम का समापन बड़े महंत परमात्मा दास महाराज के आशीर्वचन एवं आयोजन समिति के अध्यक्ष विनोद जी के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। समापन अवसर पर पूरा परिसर भारत माता की आरती, ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय श्रीराम’ के नारों से गूंज उठा। इस दौरान सम्मेलन में श्याम गुप्ता, सतीश, राजकुमार, रमेश, अक्षेबर, राजीव, नीरज, वृद्धि, अमित, भानु, आदिदेव, अभय नाथ, निधि, प्रीति, नीलम सहित बड़ी संख्या में रामभक्त एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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