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देर से बोने पर भी खेतों में लहलहाएगी गोवर्धन सरसों:तेज और उपज भी ज्यादा देगी, सीएसए के वैज्ञानिक ने विकसित की नई प्रजाति

केंद्रीय बीज समिति ने सीएसए द्वारा नवविकसित सरसों की प्रजाति गोवर्धन को पूरे देश में बिक्री हेतु घोषणा की है। इस नवीन प्रजाति को खेती के लिए मंजूरी दे दी गई। सीएसए के सरसों अभिजनक व प्रोफेसर डॉक्टर महक सिंह ने बताया कि नवविकसित सरसों प्रजाति उत्तर प्रदेश के सभी कृषि-जलवायु परिस्थितियों में खेती के लिए अतिविलम्ब की दशा में (20 से 30 नवंबर ) उपयुक्त है। इस किस्म से किसानों को बेहतर पैदावार और प्रचलित बीमारियों और कीटों के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने की क्षमता है। गेम चेंजर होने की उम्मीद डॉ सिंह ने बताया कि विकसित सरसों की प्रजाति गोवर्धन (केएमआर एल 17_5) असाधारण विशेषताओं को प्रदर्शित करती है जो इसे किसानों के लिए उपलब्ध सरसों की किस्मों के साथ एक मूल्यवान अतिरिक्त क़िस्म बनाती है। यह उत्पादन के क्षेत्र में गेम-चेंजर होने की पूरी उम्मीद है। इस किस्म में उच्च तेल सामग्री और जैविक तथा अजैविक तनावों का प्रतिरोध शामिल है। तेज और उपज भी ज्यादा उन्होंने बताया कि इसमें तेल की मात्रा अधिक (लगभग 39.6%) है। फसल 120-125 दिनों में पककर तैयार होती है और यह राष्ट्रीय किस्मों से 7.81% अधिक उपज देती है। निदेशक शोध डॉ आरके यादव ने बताया कि सरसों की इस नई प्रजाति के आने से किसानों को उनकी विशिष्ट कृषि आवश्यकताओं और भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप व्यापक विकल्प उपलब्ध होने की पूरी उम्मीद है।विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉक्टर खलील खान ने बताया कि केंद्रीय बीज समिति द्वारा इस भारतीय सरसों की प्रजाति को मंजूरी देना कृषि नवाचार को बढ़ावा देने,फसल उत्पादकता बढ़ाने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा तिलहन मिशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।


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