चित्रकूट में एक नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायाधीश रेनू मिश्रा ने आरोपी को सजा सुनाने के साथ ही तत्कालीन रैपुरा थाना प्रभारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। थाना प्रभारी पर मामले की गलत विवेचना कर एक निर्दोष व्यक्ति को फंसाने का प्रयास करने का आरोप है। विशेष लोक अभियोजक तेज प्रताप सिंह ने बताया कि यह मामला 5 अप्रैल 2020 का है। रैपुरा थाने में एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई थी कि अगरहुण्डा निवासी छोटू उर्फ तेजप्रताप गुप्ता ने उसकी मानसिक रूप से विक्षिप्त नाबालिग के साथ बलात्कार किया है। इस मामले में दोष सिद्ध होने पर विशेष न्यायाधीश रेनू मिश्रा ने आरोपी छोटू उर्फ तेजप्रताप गुप्ता को 25 साल के कठोर कारावास और 50,000 रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई। कोर्ट ने इस मामले में तत्कालीन रैपुरा थाना प्रभारी और विवेचक रमेश चंद्र की कार्यशैली पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की। आदेश में कहा गया है कि विवेचक रमेश चंद्र ने अपने पदीय कर्तव्यों के विपरीत आपराधिक कदाचार किया। उन्होंने झूठे और गढ़े हुए साक्ष्यों के आधार पर एक निर्दोष व्यक्ति को मृत्युदंड तक के अपराध में फंसाने की कोशिश की। जबकि वास्तविक अभियुक्त को विवेचना प्रक्रिया से शुरू से ही बाहर रखा गया। अदालत ने निर्देश दिया है कि विवेचक रमेश चंद्र के खिलाफ सुसंगत धाराओं के तहत अभियोग पंजीकृत कर न्यायालय को सूचित किया जाए। साथ ही, तत्कालीन थाना प्रभारी धर्मराज यादव और अन्य पर्यवेक्षणीय अधिकारियों के विरुद्ध भी आवश्यक कार्रवाई के लिए आदेश की एक प्रति अपर मुख्य सचिव गृह और उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक को भेजने को कहा गया है।
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