यूपी के बरेली में साइबर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब वे पुलिस का बड़ा अधिकारी बनकर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। इज्जतनगर थाना क्षेत्र के गायत्री नगर निवासी सुनीता सिंह के साथ एक ऐसी ही खौफनाक वारदात हुई है। ठगों ने खुद को दिल्ली पुलिस का वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सुनील कुमार गौतम बताया। फोन पर बातचीत के दौरान ठग ने सुनीता पर दबाव बनाया कि उनका बैंक खाता एक बड़े वित्तीय घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के फ्रॉड में इस्तेमाल हुआ है।
जैसे ही सुनीता ने यह सुना, वे घबरा गईं। अपराधी ने इसी घबराहट का फायदा उठाया और गिरफ्तारी का डर दिखाकर उन्हें कानूनी कार्रवाई की धमकी दी। उन्होंने कहा कि अगर वे इस केस से बचना चाहती हैं, तो उन्हें जांच के नाम पर अपनी राशि सरकारी खातों में सुरक्षित करनी होगी। अलग-अलग तारीखों में तीन खातों से किया ट्रांजैक्शन
महिला इस कदर खौफ में थी कि उसने बिना जांचे-परखे ठगों के बताए खातों में पैसे ट्रांसफर करना शुरू कर दिया। ठगी का यह सिलसिला अगस्त से सितंबर तक चला। सुनीता ने बताया कि उन्होंने 20 अगस्त को सबसे पहले 5 लाख रुपये ट्रांसफर किए। इसके बाद 21 अगस्त को 80 हजार और 23 अगस्त को 50 हजार रुपये भेजे गए। ठगों का लालच यहीं नहीं थमा, उन्होंने फिर से संपर्क किया और 8 सितंबर को सुनीता से 9 लाख रुपये की बड़ी रकम एक साथ ट्रांसफर करा ली। कुल मिलाकर पीड़िता ने 15 लाख 30 हजार रुपये अपराधियों के हवाले कर दिए। साइबर थाने की टीम अलर्ट पर
जब सुनीता को अहसास हुआ कि उनके साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है, तो उन्होंने तुरंत पुलिस से संपर्क किया। पीड़िता की तहरीर पर बरेली के साइबर क्राइम थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। एसएसपी अनुराग आर्य के सख्त निर्देशों के बाद साइबर सेल की टीम उन बैंक खातों और मोबाइल नंबर्स को ट्रेस करने में जुट गई है, जिनका इस्तेमाल इस वारदात में किया गया था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह किसी बड़े संगठित साइबर गिरोह का काम लग रहा है, जो पुलिस अधिकारियों की फर्जी प्रोफाइल बनाकर लोगों को ‘डिजिटल अरेस्ट’ जैसे दांव-पेच से डराते हैं। सावधान रहें: पुलिस कभी फोन पर नहीं मांगती पैसे
इस घटना ने एक बार फिर आम जनता के लिए चेतावनी जारी की है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली पुलिस, सीबीआई या कोई भी जांच एजेंसी कभी भी फोन पर किसी को गिरफ्तार करने की धमकी नहीं देती और न ही ‘सेटलमेंट’ के नाम पर पैसे मांगती है। यदि कोई खुद को अधिकारी बताकर आपके खाते को संदिग्ध बताए, तो तुरंत फोन काटकर अपने नजदीकी थाने में सूचना दें। साइबर सेल खंगाल रही ट्रांजैक्शन हिस्ट्री
अब पुलिस की तकनीकी टीम यह पता लगा रही है कि ठगी गई रकम किन शहरों के बैंक खातों में गई है। साइबर थाना प्रभारी ने बताया कि आमतौर पर ये ठग ‘म्यूल अकाउंट्स’ (किराए के खातों) का इस्तेमाल करते हैं, ताकि असली मास्टरमाइंड तक न पहुंचा जा सके। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अनजान कॉल्स पर अपनी वित्तीय जानकारी साझा न करें। साइबर फ्रॉड से सुरक्षा टिप्स:
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