झांसी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के सौ वर्ष पूर्ण होने पर सोमवार को दीनदयाल नगर की अग्रसेन बस्ती में विराट हिन्दू सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख सुभाष जी रहे, जबकि मुख्य अतिथि पंडोखर सरकार धाम के पीठाधीश्वर गुरुशरण महाराज मौजूद रहे।सनातन संस्कृति बचाने के लिए पाश्चात्य शब्दावली से बाहर निकलना होगा
मुख्य वक्ता सुभाष जी ने कहा कि सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए हिन्दू समाज को मिया-बीबी, वाइफ-हसबेंड और हब्बी-बब्बी जैसी शब्दावली से बाहर आना होगा। परिवार और समाज की मजबूती के लिए अपनी परंपराओं को अपनाना जरूरी है।
बेटियों को सहेली बनाएं, लव जिहाद से बचाएं: गुरुशरण महाराज मुख्य अतिथि गुरुशरण महाराज ने महिलाओं से अपील की कि वे अपनी बेटियों को सहेली बनाएं, उनसे खुलकर संवाद करें, ताकि वे किसी भी तरह के बहकावे का शिकार न हों। छात्राओं की प्रस्तुतियों ने मोहा मन
कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती बालिका विद्या मंदिर दतिया गेट की छात्राओं द्वारा नुक्कड़ नाटक और देशभक्ति गीतों से हुई। कमल सिंह चौहान बालिका विद्या मंदिर की छात्राओं ने वीरांगना लक्ष्मीबाई पर आधारित नाटक प्रस्तुत कर खूब तालियां बटोरीं। वहीं, जुगनी सीरीज की भजन गायिका प्रियम श्रीवास्तव ने “धर्म सनातन उत्तम है, डंके की चोट पर कहता हूं” भजन गाकर पंडाल को भक्तिमय बना दिया।
जो हिंदुस्थान में जन्मा, वही हिन्दू है
सुभाष जी ने कहा कि जिस तरह जर्मनी में जन्मा व्यक्ति जर्मन और फ्रांस में जन्मा व्यक्ति फ्रांसीसी कहलाता है, उसी तरह जो हिंदुस्थान में जन्मा है, वह हिन्दू है। इस अवसर पर उन्होंने “हिन्द भूमि की हम संतान” गीत भी सुनाया। धर्म रक्षा के लिए लाखों बलिदान दिए जा सकते हैं
संघ प्रचारक ने औरंगजेब की क्रूरता और गुरु तेगबहादुर महाराज के बलिदान की कथा सुनाते हुए कहा कि धर्म की रक्षा के लिए एक नहीं, लाखों बलिदान दिए जा सकते हैं। उन्होंने महाराणा प्रताप और छावा फिल्म के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए युवाओं से पुरखों की विरासत के लिए संघर्ष करना सीखने का आह्वान किया।
सनातन संस्कृति में तलाक की कोई जगह नहीं
सुभाष जी ने कहा कि मजबूत परिवार से ही मजबूत भारत का निर्माण होता है। सनातन संस्कृति में डोली आती है और अर्थी जाती है, तलाक की कोई अवधारणा नहीं है। पति-पत्नी को अपनी संस्कृति की मर्यादा में रहकर जीवन जीना चाहिए।
नए मंदिर नहीं, पुराने मंदिरों का जीर्णोद्धार करें
गुरुशरण महाराज ने कहा कि आज हम अपनी संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं। बच्चों को प्रतिदिन श्रीरामचरितमानस के दोहे और सुबह हनुमान चालीसा पढ़ने की आदत डालनी चाहिए। उन्होंने कहा कि विज्ञान के युग में अध्यात्म और भी जरूरी है। नए मंदिर बनाने के बजाय पुराने मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया जाना चाहिए। युवाओं को संस्कृति से जोड़ रहे ऐसे आयोजन
सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहीं आर्य कन्या महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अलका नायक ने चिंता जताई कि आज का युवा अपनी संस्कृति को जानने में कम रुचि ले रहा है। ऐसे आयोजन युवाओं को सनातन संस्कृति से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं।
बड़ी संख्या में पदाधिकारी व महिलाएं रहीं मौजूद
कार्यक्रम के अंत में समिति अध्यक्ष प्रवीण शर्मा ने सभी का आभार जताया। सम्मेलन में विभाग संघचालक शिव कुमार भार्गव, विभाग कार्यवाह धर्मेन्द्र, विभाग प्रचार प्रमुख मनोज टाटा, महानगर सह संघचालक जय सिंह सेंगर सहित बड़ी संख्या में संघ पदाधिकारी, कार्यकर्ता और महिलाएं मौजूद रहीं।
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