झांसी के लोगों के लिए केंद्रीय बजट 2026-27 निराशाजनक साबित हुआ है। बजट के बाद शहर में मिली-जुली नहीं, बल्कि नाराजगी भरी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। खासकर महिलाएं बजट से नाखुश नजर आईं। उनका कहना है कि सोने-चांदी के दामों में लगातार हो रही बढ़ोतरी से बचत करना मुश्किल हो गया है। वहीं, एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतों में कोई राहत न मिलने और राशन से जुड़ी महंगाई ने घरेलू बजट को और बिगाड़ दिया है। हालांकि, दूसरी तरफ भाजपा नेता बजट को नागरिकों के लिए सबसे अच्छा बजट बता रहे हैं। नौकरीपेशा वर्ग और रिटायर्ड पेंशनर्स ने भी बजट में इनकम टैक्स को लेकर किसी तरह की राहत न मिलने पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि महंगाई के इस दौर में वेतन और पेंशन पहले ही कम पड़ रही है, ऐसे में टैक्स में छूट न मिलना आम आदमी पर अतिरिक्त बोझ है।
दैनिक भास्कर से बातचीत में लोगों ने साफ तौर पर कहा कि यह बजट आम और मध्यम वर्ग की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर पाया। हालांकि, कुछ लोगों ने बजट को दूरदर्शी बताते हुए कहा कि इसके प्रभाव भविष्य में दिखाई देंगे, लेकिन फिलहाल झांसी के आम नागरिकों के लिए यह बजट राहत से ज्यादा चिंता बढ़ाने वाला रहा। महंगाई पर नाराजगी बढ़ी बजट को लेकर हमें झांसी में कुछ नौकरीपेशा महिलाएं और पुरुष भी मिले, जिन्होंने खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना था कि देश का मध्यम वर्ग ही देश की रीढ़ बनकर काम करता है। वही वर्ग सबसे ज्यादा टैक्स भरता है, लेकिन हर बजट में सरकार सबसे ज्यादा नजरअंदाज भी उसी को करती है। लोगों ने सवाल उठाया कि क्या मध्यम वर्ग सिर्फ टैक्स भरने के लिए ही है ? नौकरीपेशा पुरुषों का कहना था कि बढ़ती महंगाई के बीच वेतन और आय सीमित है, ऊपर से इनकम टैक्स में कोई राहत न मिलना मध्यम वर्ग पर दोहरी मार है। वहीं, महिलाओं ने बजट को लेकर अपनी नाराजगी और जज्बात खुलकर जाहिर किए। भाजपा ने मोदी धन्यवाद कहा, आम गृहणी नाराज महिलाओं ने कहा कि सोने के दाम इस कदर बढ़ा दिए गए हैं कि अब नाक की बाली जैसे छोटे गहने खरीदने से पहले भी कई बार सोचना पड़ता है। जब उनसे पिछले दो दिनों में सोने-चांदी की कीमतों में आई गिरावट को लेकर सवाल किया गया तो उनका गुस्सा और भी साफ नजर आया। महिलाओं ने कहा कि इसे दामों में राहत नहीं कहा जा सकता। पहले 100 रुपए बढ़ा दिए जाते हैं और फिर 25 रुपए घटा दिए जाते हैं, तो इससे आम परिवार को आखिर क्या राहत मिलने वाली है? पढ़िए बजट पर क्या बोले झांसी के लोग झांसी की रहने वालीं गरिमा वर्किंग वूमेन हैं। बजट पर बेबाकी से अपनी बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस बजट में गृहणी के लिए तो कुछ हुआ ही नहीं। एलपीजी सिलेंडर के दाम कम होने की उम्मीद थी लेकिन वह भी नहीं हुआ। बोलीं, महंगाई आसमान छू रही है। महिलाएं डेली के खर्च में से पहले कुछ बचत कर लेती थीं लेकिन अब वो भी नहीं कर पा रही हैं। सोने-चांदी के दामों को लेकर गरिमा खासी नाराज हैं। हाल ही में सोने-चांदी पर आई गिरावट को भी उन्होंने भ्रम बताया। कहा कि पहले दो लाख रुपए बढ़ा दिए और एक लाख कम कर दिए, फिर बोलो चीजें सस्ती हो गई हैं। उन्होंने दो टूक कहा कि सरकार बेवकूफ बना रही है हम लेडीज को। मिडिल क्लास पर बोझ बढ़ता जा रहा रिटायर्ड कर्मी राजकुमारी दुबे बजट को लेकर निराश हुई हैं। उन्होंने कहा कि एक एलपीजी सिलेंडर क्या, हर चीज महंगी होती जा रही है। बोलीं पहले माध्यम वर्गीय परिवारों को एलपीजी सिलेंडर पर सब्सिडी मिलती थिज़ उसे भी बंद कर दिया गया है। मिडिल क्लास के लिए कुछ तो राहत होनी चाहिए थी। हर जगह हमी लोग पीसे जाते हैं। भविष्य के लिए अच्छा है बजट बिजनेसमैन विवेक सिंघल बजट को लेकर कहते हैं कि मोदी सरकार का बजट इंफ्रास्ट्रक्चर, हेल्थ और बिजनेस के लिहाज से अच्छा है। प्रधानमंत्री का 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का जो विजन है, उसके अनुसार ये बजट आया है। बोले, ये बात सही है कि आम आदमी के लिए बजट में कुछ नहीं है। इस बार इनकम टैक्स में भी रियायत का कोई प्रावधान नहीं है। लेकिन देश को विकसित बनाने के लिए इससे अच्छा बजट नहीं हो सकता। जॉब की बात होनी चाहिए थी बालकिशन दुबे ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बजट में अनइम्प्लॉइमेन्ट की बात होनी चाहिए थी। जॉब को लेकर युवा ज़्यादा परेशान है। लेकिन मिडिल क्लास की कोई बात बजट में थी ही नहीं। इसके अलावा महंगाई पर कोई बात नहीं हुई। बोले, बजट में मिडिल क्लास से बोझ कम करने का कोई रास्ता निकलना चाहिए था।
https://ift.tt/HOgWh87
🔗 Source:
Visit Original Article
📰 Curated by:
DNI News Live

Leave a Reply