जौनपुर में मृतक सुनील राजभर के परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस कार्रवाई पर असंतोष व्यक्त करते हुए शनिवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय पर प्रदर्शन किया। उन्होंने सुनील राजभर की मौत को आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए हत्या का मुकदमा दर्ज करने और CBCID या विशेष जांच दल (SIT) से निष्पक्ष जांच की मांग की। मृतक की मां सुनीता देवी के अनुसार, उनके बेटे सुनील राजभर 16 जनवरी को सुबह लगभग 6:00 बजे मृत मिले थे। उसी दिन दोपहर 4:30 बजे उनका पोस्टमार्टम कराया गया। परिजनों का आरोप है कि इस मामले को शुरुआत से ही आत्महत्या का रूप देने के लिए साक्ष्यों से छेड़छाड़ और तथ्यों में हेराफेरी की गई है। पुलिस ने प्रारंभिक तौर पर इसे फांसी लगाकर आत्महत्या बताया था। हालांकि, परिजनों का दावा है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में वर्णित चिकित्सीय तथ्यों का वैज्ञानिक और कानूनी विश्लेषण दर्शाता है कि यह मृत्यु आत्महत्या नहीं, बल्कि गला दबाकर की गई हत्या है। उनका आरोप है कि हत्या के बाद शव को लटकाकर आत्महत्या का झूठा रूप दिया गया। परिजनों ने इसे केवल लापरवाही नहीं, बल्कि साक्ष्य मिटाने और अभियुक्तों को बचाने की आपराधिक साजिश बताया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव के कारण मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया गया है, जिससे पूरे प्रकरण में राजनीतिक हस्तक्षेप स्पष्ट होता है। परिजनों ने पुलिस पर जांच में घोर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया है। उनके अनुसार, थाना खेतासराय द्वारा न तो मृतक की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) निकाली जा रही है, न सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है, न जीपीएस लोकेशन का विश्लेषण किया जा रहा है और न ही आसपास के सक्रिय मोबाइल नंबरों की पड़ताल की जा रही है। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी उन्हें धमका रहे हैं और गाली-गलौज कर भगा देते हैं, यह कहते हुए कि वे अपने ‘पियरका गमछा वाले नेता’ से न्याय मांगें। उन्होंने जीशान पुत्र एहतेशाम उर्फ बन्ने, हमजा पुत्र शकील, बल्ली पुत्र मोहम्मद लोदी खुर्शीद चाय वाला पुत्र मकबूल सहित कुछ अन्य लोगों की भूमिका पर संदेह व्यक्त किया है, जिनके खिलाफ पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।
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