कानपुर में शुक्रवार रात जाजमऊ क्षेत्र में गंगा नदी में डाल्फिन का शव मिलने से हड़कंप मच गया। कई फीट लंबी डाल्फिन की जिस स्थान पर मौत हुई है, उस स्थान पर गंगा जल बीते लंबे समय से डी श्रेणी में है। उत्तर प्रदेश पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (यूपीपीसीबी) की ओर से जारी नवंबर 2025 की रिपोर्ट में कानपुर के सभी स्थानों का गंगाजल डी श्रेणी में रखा गया है। डी श्रेणी का अर्थ है कि गंगा जल प्रदूषित है। गंगा जल का प्रदूषित होने के बाद डाल्फिन की मौत पर सवाल उठने लगे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि डाल्फिन की मौत गंगा के प्रदूषित जल के चलते हुई है। डी श्रेणी का जल यह बताने के लिए भी काफी है, कानपुर का गंगा जल पीने योग्य नहीं है। यह है कानपुर में गंगा की स्थिति शहर में गंगा का प्रदूषित होना नमामि गंगे जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने के लिए काफी है। नवंबर की रिपोर्ट में जाजमऊ क्षेत्र में डीओ – 8.10 मिग्रा प्रति लीटर, बीओडी – 3.50 मिग्रा प्रति लीटर,टोटल कोलीफार्म – 4700 एमपीएन प्रति 100 एमएल और फीकल कोलीफार्म – 3300 एमपीएन प्रति 100 एमएल मिला है। फीकल और टोटल कोलाफार्म का ज्यादा मात्रा में मिलना इस बात का संकेत है कि पानी में मल की उपस्थिति है। मल की मात्रा का ज्यादा होना साफ कर रहा है कि कहीं न कहीं नालों व टेनरी का वेस्ट वाटर गंगा में बिना शोधित हुए जा रहा है जो कि गंगाजल को दूषित कर रहा है। इसके अलावा पानी में डिजाल्वड आक्सीजन (डीओ) भी कम है जो कि जलीय जीवों को सांस लेने में परेशानी पैदा कर सकती है। वहीं, बायोकेमिकल आक्सीजन डिमांड (बीओडी) बढ़ी हुई पाई गई है जो कि प्रदूषण का कारक है। उम्र से पहले हो गई डाल्फिन की मौत डाल्फिन की मौत के बाद उसका पोस्टमार्टम चिड़ियाघर में डाक्टरों के पैनल द्वारा किया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डाल्फिन की उम्र लगभग 20 साल आंकी गई है। जबकि इसकी औसत आयु 26-30 साल के बीच होती है। ऐसे में यह साफ है कि डाल्फिन की मौत अपनी औसत आयु से पहले हो गई है। डाक्टरों द्वारा मौत का कारण मल्टी आर्गन फेल्योर बताया जा रहा है। जो कि इसके बीमार होने का सूचक है। इसके अलावा पोस्टमार्टम में सामने आया है कि डाल्फिन का लीवर खराब हो चुका था। वह काला निकला है। ऐसे में डाल्फिन की मौत गंगा में प्रदूषण के चलते होने पर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। आईवीआरआई में स्पष्ट होगा मौत का कारण डीएफओ दिव्या ने बताया कि मौत का सही कारण जानने के लिए डाल्फिन में कुछ आर्गनंस को जांच के लिए आईवीआरआई बरेली भेजा गया है। वहां परीक्षण के बाद मौत के कारण स्पष्ट हो सकेंगे। हालांकि फिलहाल मौत का कारण मल्टी आर्गन फेल्योर माना जा रहा है।
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