चित्रकूट जिले में सरकारी स्कूलों की स्थिति पर एक बार फिर सवाल उठे हैं। हाल ही में जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने अपनी तीन वर्षीय बेटी सिया का दाखिला एक सरकारी विद्यालय में कराया। इस विद्यालय में व्यवस्थाएं संतोषजनक पाई गईं, लेकिन दैनिक भास्कर की पड़ताल में जिले के कई आंगनबाड़ी केंद्रों और प्राथमिक विद्यालयों की बदहाल स्थिति सामने आई है। दैनिक भास्कर ने जिले के पांच आंगनबाड़ी केंद्रों और प्राथमिक विद्यालयों की पड़ताल की। जांच में पाया गया कि इन केंद्रों में बच्चों का दाखिला तो कागजों में दर्ज है, लेकिन उन्हें बैठने, खेलने और अन्य मूलभूत सुविधाओं का गंभीर अभाव है। प्राथमिक विद्यालय खोही भाग-1 में 25 बच्चे नामांकित हैं। यहां की आंगनबाड़ी कार्यकत्री हीरामणि पांडे ने बताया कि बच्चों को खाने-पीने की सामग्री नियमित रूप से दी जाती है। हालांकि, बैठने की व्यवस्था बेहद खराब है, और बच्चे फटी टाट या सीधे जमीन पर बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। प्राथमिक विद्यालय खोही भाग-2 के आंगनबाड़ी केंद्र में 28 बच्चों का दाखिला है, जहां आंगनबाड़ी कार्यकत्री गायत्री तैनात हैं। इस केंद्र में भी बच्चों के बैठने के लिए न तो चटाई है और न ही कोई फर्नीचर। बच्चे फर्श पर ही बैठते हैं। पंजीरी, दाल, दलिया, तेल और चावल जैसी सामग्री हालांकि उपलब्ध कराई जा रही है।
प्राथमिक विद्यालय खोही भाग-3 में 113 बच्चे नामांकित हैं। यहां 6 कर्मचारियों का स्टाफ है, जिसमें 4 सहायक और 2 शिक्षामित्र शामिल हैं। बैठने की व्यवस्था के संबंध में प्रधानाध्यापक गरिमा ने बताया कि शासन को पत्र भेजा गया है, लेकिन फिलहाल बच्चे जमीन पर ही बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं। प्राथमिक विद्यालय चित्ररा गोकुलपुर इंग्लिश मीडियम में आंगनबाड़ी कार्यकत्री मंजू देवी और सहायिका संजना कार्यरत हैं। यहां 55 बच्चों का दाखिला है, लेकिन बैठने की कोई व्यवस्था नहीं है। छोटे बच्चे जमीन पर बैठकर ही अपना समय बिताते हुए दिखाई दिए। पड़ताल के दौरान जब टीम प्राथमिक विद्यालय कापसेठी पहुंची, तो आंगनबाड़ी केंद्र पर ताला लटका मिला। न तो आंगनबाड़ी कार्यकत्री मौजूद थीं और न ही कोई बच्चा। यह स्थिति सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
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